नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) देश का रसायन उद्योग आर्थिक वृद्धि दर से तेज रफ्तार से बढ़ते हुए वर्ष 2030 तक 230-255 अरब डॉलर के आकार तक पहुंच सकता है। मैकिंजी एंड कंपनी ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया।
वैश्विक प्रबंधन परामर्शदाता की इस रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल 155-165 अरब डॉलर के आकार वाला घरेलू रसायन उद्योग वैश्विक चुनौतियों के बावजूद आठ-नौ प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि दर से बढ़ने का अनुमान है।
रसायन उद्योग की संभावनाओं पर केंद्रित रिपोर्ट में उच्च-वृद्धि वाले आठ क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है जिनमें सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन एवं बैटरियां, नवीकरणीय ऊर्जा, निर्माण, वैमानिकी एवं रक्षा, वाहन कलपुर्जा, बायो-टू-एक्स (जैविक स्रोतों से विभिन्न उत्पादों का उत्पादन) और ई-कॉमर्स शामिल हैं।
रिपोर्ट कहती है कि ये सभी क्षेत्र वर्ष 2030 तक अतिरिक्त 30-35 अरब डॉलर की मांग पैदा कर सकते हैं और लगभग 16 प्रतिशत की दर से बढ़ सकते हैं।
मैकिंजी एंड कंपनी ने कहा कि निर्माण से जुड़े रसायनों का बाजार 2030 तक दोगुना होकर 28 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जिसे अवसंरचना और शहरी विकास का समर्थन मिलेगा।
पिछले एक दशक में भारत के रसायन उद्योग ने कुल शेयरधारक रिटर्न (टीएसआर) के मामले में करीब 17 प्रतिशत चक्रवृद्धि दर हासिल की है जो वैश्विक प्रतिस्पर्धियों और बेंचमार्क सूचकांकों से बेहतर है।
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की वैश्विक रसायन व्यापार में हिस्सेदारी अभी लगभग तीन प्रतिशत है, जो चीन (20 प्रतिशत से अधिक), यूरोपीय संघ (15 प्रतिशत से अधिक) और अमेरिका (10 प्रतिशत से अधिक) की तुलना में बहुत कम है।
मैकिंजी में साझेदार नितिका नथानी ने कहा, ‘मजबूत घरेलू मांग और भू-राजनीतिक परिस्थितियां भारत के लिए वैश्विक स्तर की विनिर्माण क्षमता विकसित करने का अवसर प्रदान करती हैं।’
हालांकि, उन्होंने कहा कि वृद्धि का अगला चरण पूंजी आवंटन में अनुशासन, बेहतर पोर्टफोलियो चयन और नवाचार में निरंतर निवेश पर निर्भर करेगा।
भाषा प्रेम राजेश प्रेम
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