भारत में खेती का उत्पादन 2024-25 में रिकॉर्ड 35.7 करोड़ टन हुआ: जम्मू-कश्मीर उपराज्यपाल

भारत में खेती का उत्पादन 2024-25 में रिकॉर्ड 35.7 करोड़ टन हुआ: जम्मू-कश्मीर उपराज्यपाल

भारत में खेती का उत्पादन 2024-25 में रिकॉर्ड 35.7 करोड़ टन हुआ: जम्मू-कश्मीर उपराज्यपाल
Modified Date: April 28, 2026 / 09:21 pm IST
Published Date: April 28, 2026 9:21 pm IST

जम्मू, 28 अप्रैल (भाषा) जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को कहा कि भारत जलवायु चुनौतियों के खिलाफ लड़ाई में सबसे आगे है, और देश का कृषि उत्पादन वित्त वर्ष 2024-25 में 35.7 करोड़ टन तक पहुंच गया है, जो 2023-24 की तुलना में 2.5 करोड़ टन ज़्यादा है।

सिन्हा ने जम्मू में शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में ‘टिकाऊ और जलवायु-सहिष्णु कृषि पारिस्थितिकी तंत्र: नवाचार और नीति ढांचा’ पर राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा, ‘‘वैज्ञानिकों, नवप्रवर्तकों और अन्य अंशधारकों को खेती को जलवायु-सहिष्णु बनाने तथा टिकाऊ कृषि-पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए एक साथ आना चाहिए।’’

सिन्हा ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम छोटे-मोटे बदलावों से आगे बढ़कर बड़े, विज्ञान-आधारित और किसान-केंद्रित बदलावों को अपनाएं।

उपराज्यपाल ने कहा, ‘‘नीतियों को जलवायु-सहिष्णु फसलों को बढ़ावा देना चाहिए। हमें प्रयोगशाला और खेत के बीच की खाई को पाटना होगा, और शोधकर्ताओं को जलवायु के अनुकूल किस्मों को विकसित करने को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बनानी चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि खेत ही सभ्यता की नींव, अर्थव्यवस्थाओं की रीढ़ और कल के भविष्य की उम्मीद हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हर नीति, हर हस्तक्षेप को इस बात का सम्मान करना चाहिए कि हमारे खेतों और किसानों ने सदियों की उथल-पुथल के दौरान मानवता को संभाला है। अब जलवायु परिवर्तन का खतरा किसान के खेत से कहीं आगे तक पहुंच गया है और कृषि तथा उससे जुड़े क्षेत्रों पर निर्भर हर जीवन को खतरे में डाल रहा है। इस संकट की गंभीरता को देखते हुए अब देरी की कोई गुंजाइश नहीं है।’’

उपराज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वित्तवर्ष 2024-25 में भारत का कृषि उत्पादन 35.7 करोड़ टन तक पहुंच गया, जबकि बागवानी उत्पादन 36.2 करोड़ टन था।

उन्होंने कहा कि वित्तवर्ष 2013-14 से लेकर अब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर दलहनों की खरीद में 7,350 प्रतिशत और तिलहन की खरीद में 1,500 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हालांकि, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव तीव्र होते जा रहे हैं, और पिछले वर्ष विभिन्न राज्यों में चरम मौसम की घटनाएं देखी गईं।

भाषा राजेश पाण्डेय

पाण्डेय


लेखक के बारे में