मार्च में रूस से भारत का कच्चा तेल आयात तीन गुना होकर 5.3 अरब यूरो पर

Ads

मार्च में रूस से भारत का कच्चा तेल आयात तीन गुना होकर 5.3 अरब यूरो पर

  •  
  • Publish Date - April 14, 2026 / 05:52 PM IST,
    Updated On - April 14, 2026 / 05:52 PM IST

नयी दिल्ली, 14 अप्रैल (भाषा) भारत की मार्च, 2026 में रूस से कच्चे तेल की खरीद तीन गुना से अधिक होकर 5.3 अरब यूरो रही है।

यह वृद्धि आयात मात्रा दोगुनी होने और वैश्विक तेल कीमतों में उछाल के कारण हुई।

यूरोपीय शोध संस्था सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी में खरीद में गिरावट के बाद मार्च में भारत ने रूस से तेल की खरीद फिर तेज कर दी।

रिपोर्ट में कहा गया कि मार्च, 2026 में भारत रूस से जीवाश्म ईंधन खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश रहा। इस दौरान भारत ने कुल 5.8 अरब यूरो के रूसी ईंधन उत्पादों का आयात किया, जिनमें कच्चे तेल की हिस्सेदारी 91 प्रतिशत (5.3 अरब यूरो) रही।

शेष आयात में कोयला (33.7 करोड़ यूरो) और पेट्रोलियम उत्पाद (17.85 करोड़ यूरो) शामिल रहे।

फरवरी में भारत, रूस से ऊर्जा आयात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश था और कुल आयात 1.8 अरब यूरो रहा था। उस समय कच्चे तेल की हिस्सेदारी 81 प्रतिशत (1.4 अरब यूरो) थी। कोयले की हिस्सेदारी 22.3 करोड़ यूरो और पेट्रोलियम उत्पादों की 12.1 करोड़ यूरो थी।

रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में चार प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, लेकिन रूस से आयात दोगुना हो गया।

यह वृद्धि अमेरिका द्वारा रूसी तेल पर एक महीने की प्रतिबंध छूट दिए जाने के बाद हुई। यह छूट पहले से समुद्र में मौजूद खेपों और पहले प्रतिबंधित जहाजों से हो रही आपूर्ति पर लागू थी। इसका उद्देश्य ईरान के साथ तनाव के बाद बढ़ी कीमतों को नियंत्रित करना था।

इस छूट के बाद सरकारी रिफाइनरियों, जिन्होंने पहले रूस से तेल खरीद रोक दी थी, ने फिर से आयात शुरू कर दिया।

रिपोर्ट में कहा गया कि मार्च में सबसे बड़ा बदलाव सरकारी रिफाइनरियों के आयात में देखा गया, जिसमें मासिक आधार पर 148 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

यह आयात मार्च, 2025 की तुलना में 72 प्रतिशत अधिक रहा, जिसका कारण वायदा बाजार में रूसी तेल की अधिक उपलब्धता बताया गया है।

मैंगलुरु और विशाखापत्तनम स्थित सरकारी रिफाइनरियों ने नवंबर, 2025 के अंत में रूस से आयात रोक दिया था, लेकिन मार्च, 2026 में फिर से खरीद शुरू कर दी।

फरवरी में भारत, चीन और तुर्किये के बाद तीसरा सबसे बड़ा आयातक था।

रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी में रूस से भारत के कच्चे तेल आयात में 19 प्रतिशत की कमी आई थी, जबकि कुल आयात में नौ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। इसके बावजूद रूस फरवरी में भी भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहा और कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी 20 प्रतिशत थी।

सीआरईए ने कहा कि रूस अपने तेल निर्यात के लिए एशियाई बाजारों, खासकर भारत और चीन, पर अत्यधिक निर्भर है। 2026 की पहली तिमाही में रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात का 90 प्रतिशत हिस्सा इन दोनों देशों को गया।

यूरोपीय संघ द्वारा 21 जनवरी, 2026 से रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध के बावजूद, मार्च में ऐसे 14 जहाजों ने यूरोपीय बंदरगाहों पर तेल उत्पाद उतारे, जो रूसी कच्चे तेल का उपयोग करने वाली रिफाइनरियों से जुड़े थे।

यूरोपीय संघ द्वारा 21 जनवरी, 2026 से रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध के बावजूद, मार्च में ऐसे 14 जहाजों ने यूरोपीय बंदरगाहों पर तेल उत्पाद उतारे, जो रूसी कच्चे तेल का उपयोग करने वाली रिफाइनरियों से जुड़े थे।

इनमें से नौ खेप तुर्किये की रिफाइनरियों से, चार भारत से और एक जॉर्जिया से भेजी गई थीं। कुछ जहाजों ने कई यूरोपीय बंदरगाहों पर तेल उत्पाद उतारे।

फ्रांस मार्च में इन खेप का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता रहा, जहां चार खेप उतारी गईं, इसके बाद साइप्रस (तीन खेप) का स्थान रहा। इसके अलावा बेल्जियम, बुल्गारिया, इटली और नीदरलैंड ने भी दो-दो खेप प्राप्त कीं।

रिपोर्ट में कहा गया कि सदस्य देशों की प्रवर्तन एजेंसियों को ऐसे आयात की जांच करनी चाहिए, ताकि रूसी कच्चे तेल से बने उत्पाद यूरोपीय संघ में प्रवेश न कर सकें और प्रतिबंध का उल्लंघन न हो।

भाषा योगेश अजय

अजय