नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) एक्सेंचर की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) जूली स्वीट ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत प्राथमिक विद्यालय से ही शिक्षा प्रणाली में कृत्रिम मेधा (एआई) को शामिल करने की दिशा में शानदार काम कर रहा है और दुनिया भर की सरकारों को भी ऐसा करने की जरूरत होगी।
‘एआई इम्पैक्ट समिट’ को संबोधित करते हुए उन्होंने एआई-सक्षम भविष्य में भारत की महत्ता को रेखांकित किया।
स्वीट ने बताया कि एक्सेंचर भारत में साढ़े तीन लाख से अधिक लोगों को रोजगार देती है और यहां कंपनी के पास वैश्विक स्तर पर एआई का सबसे बड़ा कार्यबल है, जो अमेरिका, यूरोप, पश्चिम एशिया और जापान के केंद्रों के साथ एकीकृत है।
स्वीट ने कहा, ‘‘शिक्षा अब कोई मंजिल नहीं रह गई है। हमें जीवन भर सीखते रहने की प्रवृत्ति अपनानी होगी। भारत प्राथमिक स्कूल से ही एआई को शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बनाने में बेहतरीन काम कर रहा है और वैश्विक स्तर पर सरकारों को इसका अनुसरण करना होगा।’’
उन्होंने कहा कि जिस तरह देश अलग तरह से सोच रहे हैं, वैसे ही व्यक्तियों को भी यह समझना होगा कि औपचारिक शिक्षा अब अंतिम लक्ष्य नहीं है।
स्वीट ने कहा, ‘‘जब कंपनियां और देश नयी प्रौद्योगिकियों को अपनाते हैं और विकास एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिए उनका उपयोग करते हैं, तो वे प्रगति करते हैं।’’ पिछले दशक में रोबोटिक प्रोसेस ऑटोमेशन और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के अपनाए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि स्वचालन बढ़ने के बावजूद आईटी सेवा उद्योग ने अधिक रोजगार पैदा किए हैं।
स्वीट ने इस बात पर भी जोर दिया कि एआई के कारण आने वाले बदलावों के बावजूद कंपनियों को शुरुआती स्तर की नौकरियों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रवेश स्तर की नौकरियां आर्थिक रूप से तर्कसंगत हैं। भविष्य के अगुवा तैयार करने का यही एकमात्र तरीका है।’’
उन्होंने घोषणा की कि एक्सेंचर इस साल पिछले वर्ष की तुलना में शुरुआती स्तर की भूमिकाओं में अधिक लोगों की भर्ती करेगी।
भाषा
सुमित अजय
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