नई दिल्ली। Private Employees Pension Amount प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की न्यूनतम वेतन सीमा और पेंशन राशि को लेकर एक बार फिर देश भर में चर्चा शुरू हो गई है। श्रमिक संगठनों ने Employees’ Pension Scheme 1995 (EPS-95) के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन ₹1,000 से बढ़ाकर ₹9,000 प्रति माह करने की मांग उठाई है। यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट और संसद तक पहुंच गया है। इस मसले पर प्राइवेट कर्मचारियों की आस जगी है कि उनकी पेशन राशि और न्यूनतम वेतन सीमा में बढ़ोतरी हो सकती है।
क्या है EPS-95?
EPS-95 वर्ष 1995 में शुरू की गई पेंशन योजना है, जिसे Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) संचालित करता है। यह योजना संगठित क्षेत्र के निजी कर्मचारियों के लिए है। जब कर्मचारी EPF में योगदान करता है, तो नियोक्ता के हिस्से का 8.33 प्रतिशत पेंशन फंड में जमा किया जाता है। इसके अलावा केंद्र सरकार ₹15,000 तक के वेतन पर 1.16 प्रतिशत का योगदान देती है। इस योजना के तहत कम से कम 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारी 58 वर्ष की आयु के बाद मासिक पेंशन के हकदार होते हैं। हालांकि, यह पेंशन महंगाई से जुड़ी नहीं है, जिसके कारण समय के साथ इसकी वास्तविक कीमत कम होती जाती है।
क्या है मौजूदा पेंशन व्यवस्था?
EPS-95 के अंतर्गत पेंशन की गणना कर्मचारी की वेतन सीमा और पेंशन योग्य सेवा अवधि के आधार पर की जाती है। वर्तमान में न्यूनतम पेंशन ₹1,000 प्रति माह तय है। यदि किसी पेंशनर की गणना के अनुसार राशि ₹1,000 से कम बनती है, तो सरकार बजट सहायता के जरिए उसे ₹1,000 तक सुनिश्चित करती है। अधिकतम पेंशन का निर्धारण ₹15,000 की वेतन सीमा के आधार पर होता है। यदि किसी कर्मचारी ने 35 वर्ष की पेंशन योग्य सेवा पूरी की है, तो तय फॉर्मूले (15,000 × 35) / 70 के अनुसार लगभग ₹7,500 प्रति माह पेंशन बनती है। हालांकि, सुप्रीम Court के निर्णय के बाद जिन कर्मचारियों ने वास्तविक वेतन पर योगदान का विकल्प चुना, उनकी पेंशन ₹7,500 से अधिक भी हो सकती है। ऐसे मामलों में कुछ पेंशनरों को ₹9,000 या उससे ज्यादा मासिक पेंशन मिल रही है।
बढ़ती महंगाई में बढ़ी मांग
Private Employees Pension Amount श्रमिक संगठनों का कहना है कि मौजूदा ₹1,000 की न्यूनतम पेंशन आज के दौर में जीवन-यापन के लिए अपर्याप्त है। उनका तर्क है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए इसे कम से कम ₹9,000 किया जाना चाहिए और इसे महंगाई सूचकांक से जोड़ा जाना चाहिए। सरकार की ओर से फिलहाल कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है, लेकिन लगातार बढ़ते दबाव के बीच यह मुद्दा आने वाले समय में नीति-निर्माण के केंद्र में रह सकता है।
श्रम राज्य मंत्री ने कही ये बड़ी बात
रिपोर्ट्स में बताया गया है कि हाल ही में लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब में श्रम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने स्वीकार किया कि ट्रेड यूनियनों और जनप्रतिनिधियों ने पेंशन बढ़ाने की मांग की है। हालांकि सरकार ने अभी कोई समयसीमा नहीं बताई है। सरकार ने स्पष्ट किया कि EPS-95 रिटर्न आधारित नहीं, बल्कि तय योगदान और तय फायदे वाली योजना है। पेंशन फंड दो मुख्य स्रोतों से बनता है। पहला नियोक्ता अपने कर्मचारी के वेतन का 8.33 प्रतिशत देता है। फिर केंद्र सरकार ₹15,000 तक के वेतन पर 1.16 प्रतिशत योगदान करती है। इसके अलावा सरकार बजटीय सहायता के जरिए ₹1,000 की न्यूनतम पेंशन सुनिश्चित करती है। फिलहाल, करीब 47 लाख पेंशनर ऐसे हैं जिन्हें ₹9,000 से कम पेंशन मिल रही है। इसी वजह से यह मांग राजनीतिक और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण बनी हुई है।
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