Congress Reaction on Freebies Culture || Image- Atal Shrivastava FB File
रायपुर: फ्रीबीज पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। इस पूरे विषय पर कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सत्तादल भाजपा पर कई गंभीर आरोप लगाए है।
अटल श्रीवास्तव ने कहा कि, पहले योजनाएं असहायों की मदद के लिए लाई गई थीं भाजपा ने सत्ता में आने के लिए योजनाओं का इस्तेमाल किया। (Congress Reaction on Freebies Culture) कहीं महतारी वंदन योजना, कहीं दूसरी योजनाएं बनाई। भाजपा कहीं 1 हजार, कहीं 5 हजार, कहीं 20 हजार दे रही है। चुनाव के समय घोषणाएं हुईं, सत्ता में आने पर देना पड़ रहा है।
अब बीजेपी अपने ही लोगों से कोर्ट में याचिका दायर करा रही है। सुप्रीम सुप्रीम कोर्ट से आदेश करा रही है, ताकि आगे ना बांटना पड़े। जैसे 70 लाख महिलाओं को महतारी वंदन योजना की राशि दे रहे हैं। अब उन्हें यह भारी पड़ रहा है। सरकार इसको हटाना चाहती है, लेकिन कांग्रेस पार्टी सचेत रहेगी, ऐसी कोई भी योजना बंद न हो।
गौरतलब है कि, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव से पहले राज्य की सरकारों द्वारा दी जाने वाली मुफ्त योजनाओं (फ्रीबीज) पर सख्त टिप्पणी करते हुए सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर पूछा है कि, अगर राज्य लगातार “मुफ्त खाना, मुफ्त बिजली” जैसी योजनाएं देते रहेंगे तो विकास कार्यों के लिए पैसा कहां से आएगा? दरअसल पिछले दिनों तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड ने सभी उपभोक्ताओं को, उनकी आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना, मुफ्त बिजली देने की योजना पेश की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसी विषय के आधार पर आज की टिप्पणी की है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि इस तरह की योजनाएं देशभर में एक ऐसी संस्कृति बना रही हैं, जिसमें बिना काम किए लाभ मिलने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों की मदद करना सरकार का कर्तव्य है, लेकिन जो लोग भुगतान करने में सक्षम हैं, उन्हें भी मुफ्त सुविधाएं देना गलत है। (Congress Reaction on Freebies Culture) उन्होंने पूछा कि क्या अब समय नहीं आ गया है कि राज्य अपनी नीतियों की समीक्षा करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्यों को अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा विकास कार्यों जैसे सड़क, अस्पताल और शिक्षा पर खर्च करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से कहा कि ऐसी नीतियों के कारण विकास के लिए पैसा नहीं बचता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह समस्या केवल एक राज्य की नहीं, बल्कि पूरे देश की है। वहीं जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि अगर राज्य फ्रीबीज देना चाहते हैं, तो उन्हें इसे बजट में स्पष्ट रूप से शामिल कर बताना चाहिए कि इसके लिए धन की व्यवस्था कैसे की जाएगी।
The Supreme Court has strongly criticised the distribution of “freebies” by political parties of all states and expressed concern over its impact on public finances.
The Court has said that instead of distributing resources by freebie schemes, the political parties should come… pic.twitter.com/VdoC1p4XbE
— ANI (@ANI) February 19, 2026
#BREAKING: Supreme Court comes down heavily on freebies by states
• CJI Surya Kant flags growing “largesse distribution” by states despite mounting revenue deficits.
Asks: who will ultimately pay for these schemes if not the taxpayer?• Court questions the fiscal wisdom of… pic.twitter.com/aqcIZxBtoS
— Bar and Bench (@barandbench) February 19, 2026
फ्रीबीज यानी मुफ्त या रियायती सुविधाएं वे चीजें होती हैं, जिन्हें सरकार या राजनीतिक दल लोगों को बिना पैसे या बहुत कम कीमत पर उपलब्ध कराते हैं। इसमें मुफ्त बिजली-पानी, राशन, गैस सिलेंडर, नकद राशि (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) और लैपटॉप, साइकिल जैसी वस्तुएं शामिल हैं। ये सुविधाएं आमतौर पर गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए तथा सामाजिक कल्याण योजनाओं के तहत दी जाती हैं, हालांकि कई बार चुनाव के दौरान वोटरों को आकर्षित करने के उद्देश्य से भी इनका उपयोग किया जाता है।
हालांकि फ्रीबीज को लेकर लगातार विवाद भी बना रहता है। लोगों का कहना है कि बिना जरूरतमंद और सक्षम लोगों के बीच अंतर किए सभी को लाभ देना सही नहीं है। (Congress Reaction on Freebies Culture) इससे सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और विकास कार्यों जैसे सड़क, अस्पताल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए संसाधनों की कमी हो सकती है।