नयी दिल्ली, छह फरवरी (भाषा) उद्योग जगत और उद्यम पूंजी (वीसी) कंपनियों ने सरकार द्वारा स्टार्टअप की परिभाषा में ‘डीप टेक’ कंपनियों को शामिल करने और स्टार्टअप की मान्यता के लिए कुल कारोबार की सीमा को दोगुना करने के फैसले का स्वागत किया है।
उन्होंने शुक्रवार को कहा कि इससे संस्थापकों को अधिक निश्चितता मिलेगी, लगातार नवाचार संभव होगा और दीर्घकालिक पूंजी आकर्षित करने में मदद मिलेगी।
एक अधिसूचना के अनुसार, सरकार ने कारोबार की सीमा को 100 करोड़ रुपये से दोगुना कर 200 करोड़ रुपये करके स्टार्टअप के रूप में मान्यता प्राप्त करने के मानदंडों का विस्तार किया है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) की अधिसूचना में कहा गया है कि अत्याधुनिक और क्रांतिकारी प्रौद्योगिकी पर काम करने वाली संस्थाओं के लिए ‘डीप टेक स्टार्टअप’ की एक नई श्रेणी भी शुरू की गई है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कारोबार की सीमा को दोगुना करके 200 करोड़ रुपये करने के सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इस कदम से नवाचार संचालित उद्यमों को बड़े पैमाने पर स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर बने रहने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘ये सुधार संस्थापकों को अधिक निश्चितता प्रदान करेंगे, निरंतर नवाचार को सक्षम करेंगे और दीर्घकालिक पूंजी को आकर्षित करेंगे। आज डीप टेक के लिए समर्थन मजबूत करके भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षमताएं बना रहा है और रणनीतिक आत्मनिर्भरता बढ़ा रहा है।’’
डीप टेक और फ्रंटियर तकनीक क्षेत्र में संस्थापकों का समर्थन करने वाली वीसी फर्म स्पेशल इन्वेस्ट के संस्थापक पार्टनर विशेष राजाराम ने इसे निर्णायक और दूरदर्शी कदम बताया।
डीप टेक फर्मों को वित्तपोषित करने वाले बीवाईटी कैपिटल के संस्थापक अमित चंद ने कहा कि यह एक समय पर उठाया गया कदम है। उन्होंने कहा, ‘‘इससे भारत में डीप टेक के लिए समयसीमा, पूंजी दक्षता और निवेश योग्यता में सुधार होगा।’’
भाषा पाण्डेय अजय
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