खेती में नवाचार से उपभोक्ताओं की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए: एफएसएसएआई

खेती में नवाचार से उपभोक्ताओं की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए: एफएसएसएआई

खेती में नवाचार से उपभोक्ताओं की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए: एफएसएसएआई
Modified Date: September 18, 2026 / 10:23 pm IST
Published Date: September 18, 2026 10:23 pm IST

नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि खेती के क्षेत्र में नवाचार उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षा मानकों को कम करके नहीं किया जाना चाहिए।

एफएसएसएआई की निदेशक स्वीटी बेहरा ने कहा कि खेती में नवाचार का मकसद सिर्फ फसल की पैदावार बढ़ाना नहीं, बल्कि टिकाऊपन और ग्राहकों की सुरक्षा का ध्यान रखना भी होना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘नवाचार हमेशा अच्छा होता है, नवाचार हमेशा होना चाहिए, और विनियमन और नवाचार साथ-साथ चलने चाहिए। इसे ऐसे नहीं देखा जाना चाहिए कि दोनों एक-दूसरे से मुकाबला कर रहे हैं।’’

बेहरा ने कहा कि खेती की फसलों और खाने-पीने की चीजों में कीटनाशकों के अवशेष की सीमा वैज्ञानिक सबूतों, जोखिम-आधारित तरीकों और निगरानी पर आधारित होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘नवाचार को किसी खाद्य उत्पाद की सुरक्षा को कम करने के तरीके के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि इसके बजाय नवाचार का मकसद ग्राहकों के लिए सुरक्षा का स्तर बढ़ाना होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा मानकों को कम करने के बजाय, फसलों के इस्तेमाल के बाद उनमें नए या उभरते हुए दूषित पदार्थों और अवशेषों का पता लगाने के तरीके खोजने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

बेहरा भारतीय कृषि-रसायन महासंघ (एसीएफआई) की 9वीं सालाना आम बैठक के दौरान आयोजित एक पैनल चर्चा में बोल रही थीं।

इस सत्र को एसीएफआई के अध्यक्ष राहुल धनुका, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार विशाल चौधरी, आईआईटी दिल्ली की व्याख्याता काव्या दशोरा, बायर क्रॉपसाइंस के राजवीर सिंह राठी और सेंटर फॉर नैनो रिसर्च एंड एग्रीकल्चरल बायोटेक्नोलॉजी की निदेशक और सीनियर फेलो पुष्पलता सिंह ने भी संबोधित किया।

भाषा राजेश राजेश रमण पाण्डेय

पाण्डेय


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