नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) भारत के आवासीय रियल एस्टेट क्षेत्र में संस्थागत निवेश चालू कैलेंडर साल की पहली छमाही (जनवरी-जून) के दौरान 85 प्रतिशत घटकर 15.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर रह गया। रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी कुशमैन एंड वेकफील्ड ने यह जानकारी दी है।
कंपनी ने मंगलवार को भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र में संस्थागत निवेश से जुड़े आंकड़े जारी करते हुए बताया कि 2026 की पहली छमाही में कुल निवेश छह प्रतिशत बढ़कर 3.46 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 3.26 अरब अमेरिकी डॉलर था।
रिपोर्ट के अनुसार, निवेश में यह सीमित वृद्धि मुख्य रूप से घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी के कारण हुई। परिसंपत्ति वर्गों में कार्यालय और डेटा सेंटर परियोजनाओं को सबसे अधिक निवेश प्राप्त हुआ।
आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी-जून, 2026 के दौरान आवास क्षेत्र में संस्थागत निवेश 85 प्रतिशत घटकर 15.36 करोड़ अमेरिकी डॉलर रह गया जो एक वर्ष पहले की समान अवधि में 101.99 करोड़ अमेरिकी डॉलर था।
खुदरा रियल एस्टेट क्षेत्र में भी निवेश 54.24 करोड़ अमेरिकी डॉलर से घटकर 16.15 करोड़ डॉलर रह गया।
वहीं कार्यालय क्षेत्र में निवेश दोगुने से अधिक होकर 197.07 करोड़ डॉलर रहा जो एक वर्ष पहले की समान अवधि में 72.95 करोड़ डॉलर था।
इसी तरह, डेटा सेंटर परियोजनाओं में जनवरी-जून, 2026 के दौरान 83.89 करोड़ डॉलर का निवेश हुआ, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में इस क्षेत्र में कोई निवेश नहीं हुआ था।
कुशमैन एंड वेकफील्ड के कार्यकारी प्रबंध निदेशक (पूंजी बाजार) सोमी थॉमस ने कहा कि विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों में पूंजी आवंटन का रुझान अब अधिक स्पष्ट रूप से अलग-अलग दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘कार्यालय क्षेत्र अपनी परिपक्वता, नकदी और स्थिर आय से निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। वहीं, भारत के तेजी से विकसित हो रही डिजिटल अवसंरचना तंत्र का लाभ उठाने के लिए डेटा सेंटर क्षेत्र में भी निवेशकों की रुचि बढ़ रही है। पूंजी का यह विविधीकरण निवेश परिदृश्य को और अधिक गहरा तथा मजबूत बना रहा है।’’
थॉमस ने कहा कि 2026 की दूसरी छमाही में भी निवेश गतिविधियां मजबूत रहने की उम्मीद है और घरेलू निवेशक बाजार की गति बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते रहेंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में घरेलू संस्थागत निवेश 2.2 अरब अमेरिकी डॉलर और विदेशी निवेश 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
भाषा निहारिका अजय
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