खदानों के पास बढ़ रहा लौह अयस्क भंडार: एफआईएमआई

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खदानों के पास बढ़ रहा लौह अयस्क भंडार: एफआईएमआई

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  • Publish Date - October 13, 2020 / 12:40 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:52 PM IST

नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) भारतीय खनिज उद्योग संगठन एफआईएमआई ने कहा है कि खदानों के मुहाने पर लौह अयस्क भंडार बढ़ता जा रहा है और अगर इसके निर्यात की अनुमति नहीं दी गयी, यह बर्बाद हो जाएगा। संगठन के अनुसार निर्यात की अनुमति से देश के लिये मूल्यवान विदेशी मुद्रा अर्जित की जा सकती है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन मिनरल इंडस्ट्रीज (एफआईएमआई) ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को लिखे पत्र में कहा कि फिलहाल देश में करीब 16.5 करोड़ टन लौह अयस्क की जरूरत है जबकि उत्पादन 20.6 करोड़ टन है। इस्पात बनाने में इस कच्चे माल का उपयोग मुख्य रूप से होता है।

पत्र के अनुसार, ‘‘खदानों के पास भंडार साल-दर-साल बढ़ता जा रहा है। अगर इन लौह अयस्क का इस्पात और स्पांजी आयरन संयंत्रों से मांग नहीं होती है तथा कंपनियों को निर्यात की अनुमति नहीं दी जाती है, यह बारिश के दौरान नदी-नालों में चला जाएगा, जिससे खनिज की बर्बादी होगी।’’

संगठन के अनुसार खनन कंपनियां लौह अयस्क का निर्यात वैध रूप से एकमात्र उपलब्ध खरीदार चीन को कर रही हैं और देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान कर रही हैं।

पत्र में कहा गया है कि अगर इस्पात उद्योग इस लौह अयस्क को खरीदता है, तब निर्यात की कोई जरूरत नही होगी।

भाषा

रमण मनोहर

मनोहर