मुंबई, 15 अप्रैल (भाषा) एनसीपी (एसपी) नेता जयंत पाटिल ने बुधवार को कहा कि ‘‘निर्यात रुकने के बाद प्याज की कीमतों में भारी गिरावट’ की वजह से किसान बहुत परेशान हैं, जबकि उत्पादन लागत ‘ज्यादा’ बनी हुई है। उन्होंने इस संदर्भ में सरकार से दखल देने की अपील की।
हालांकि, महाराष्ट्र के प्याज किसानों ने आरोप लगाया है कि उनकी आर्थिक तंगी के लिए केंद्र और विपक्ष दोनों जिम्मेदार हैं। इसने राज्य के सभी सांसदों से एक साथ आकर रसोई की इस जरूरी चीज पर चिंता जताने की अपील की।
पाटिल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक बयान में कहा कि प्याज उत्पादन की लागत लगभग ₹2,200 प्रति क्विंटल है, जबकि किसानों को अभी बाजार में केवल, ₹900 से ₹1,300 प्रति क्विंटल का दाम ही मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि किसान दोहरे संकट का सामना कर रहे हैं, पश्चिम एशिया में संघर्ष की वजह से निर्यात पर असर पड़ा है और बेमौसम बारिश की वजह से कटाई के चरण पर पहुंच चुकी फसलों को नुकसान हुआ है।
पाटिल ने राज्य सरकार से तुरंत दखल देने, प्याज का निर्यात फिर से शुरू करने की कोशिश बढ़ाने और किसानों को राहत देने के लिए सही कीमत का ऐलान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसान समुदाय बहुत ज्यादा तनाव में है और उन्हें तुरंत मदद की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ‘‘एक तरफ, युद्ध जैसे हालात की वजह से निर्यात रोक दिया गया है और दूसरी तरफ, बेमौसम बारिश की वजह से कटाई के लिए तैयार फसलें खराब हो गई हैं। इस दोहरे संकट ने किसानों को बहुत मुश्किल में डाल दिया है।’’
पाटिल ने बयान में कहा, ‘‘मुख्यमंत्री को तुरंत दखल देना चाहिए, प्याज का निर्यात फिर से शुरू करने की कोशिशें तेज करनी चाहिए और किसानों के लिए सही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का ऐलान करना चाहिए।’’
इस बीच, महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने राज्य में प्याज किसानों की मौजूदा वित्तीय दिक्कतों के लिए केंद्र और विपक्ष दोनों को ‘जिम्मेदार’ ठहराया।
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के संस्थापक-अध्यक्ष भरत दिघोले ने पीटीआई-भाषा को बताया कि केंद्र के वर्ष 2023 में प्याज के निर्यात पर ‘अचानक प्रतिबंध’ लगाने के फैसले के बाद कीमतों में भारी गिरावट आई, जिससे किसानों पर बहुत बुरा असर पड़ा। निर्यात पर पाबंदी के तहत निर्यात शुल्क और न्यूनतम निर्यात मूल्य जैसी पाबंदियां लगाई गईं।
उन्होंने दावा किया कि ‘‘किसानों में गुस्सा वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में दिखा, जहां महाराष्ट्र में प्याज उगाने वाले इलाके से सत्तारूढ़ दल के कई सांसद हार गए।’’
किसान नेता ने विपक्ष, खासकर महाराष्ट्र के सांसदों की भी आलोचना की। विकास अघाड़ी (एमवीए) पर इस मुद्दे पर ‘निष्क्रियता’ का आरोप लगाया।
दिघोले ने कहा, ‘‘किसानों के समर्थन से चुने जाने के बावजूद, महाराष्ट्र के 31 एमवीए सांसद प्याज के संकट पर मजबूत और एकजुट रुख लेने में नाकाम रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि जयंत पाटिल समेत विपक्षी नेताओं के बयान और सोशल मीडिया पोस्ट का स्वागत है, लेकिन वे संकट को हल करने के लिए काफी नहीं हैं।
दिघोले ने महाराष्ट्र के सभी सांसदों और विधायकों से राजनीतिक मतभेदों को अलग रखकर दिल्ली में मिलकर इस मुद्दे को उठाने और केंद्र पर सुधार के कदम उठाने का दबाव बनाने की अपील की।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की नीतियां ‘किसान विरोधी’ हैं और विपक्ष की मजबूती की कमी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है।
दिघोले ने कहा कि एपीएमसी (कृषि उत्पाद बाजार समितियां) में खरीफ प्याज की फसल 300 रुपये से 700 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रही है, जबकि रबी प्याज की फसल का दर 500 रुपये से 1,100 रुपये प्रति क्विंटल है। वहीं उत्पादन लागत 1,800 रुपये से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल है।
उन्होंने कहा कि प्याज के निर्यात में कुल मिलाकर 30 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि खाड़ी देशों को निर्यात में 55 से 60 प्रतिशत की गिरावट आई है।
भाषा राजेश राजेश रमण
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