नयी दिल्ली, पांच मार्च (भाषा) साइबर सुरक्षा कंपनी कैस्परस्काई का दावा है कि उसने साल 2025 में भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को 4.7 करोड़ से अधिक वेब आधारित खतरों से बचाया है।
कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 24.7 प्रतिशत इंटरनेट उपयोगकर्ता इन खतरों की चपेट में आए।
कैस्परस्काई ने बयान में कहा कि भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को औसतन प्रतिदिन लगभग 1,30,209 वेब खतरों का सामना करना पड़ा।
कंपनी ने कहा, ‘‘भारत में लगभग एक-चौथाई (24.7 प्रतिशत) इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को 2025 में वेब आधारित खतरों का सामना करना पड़ा। जनवरी और दिसंबर, 2025 के बीच कैस्परस्काई उत्पादों ने देश भर में उपयोगकर्ताओं के कंप्यूटर पर 4,75,26,422 इंटरनेट आधारित साइबर खतरों का पता लगाया और उन्हें रोका।”
कैस्परस्काई सिक्योरिटी नेटवर्क (केएसएन) के आंकड़ों के अनुसार, वेब आधारित खतरों से प्रभावित उपयोगकर्ताओं के मामले में वैश्विक स्तर पर भारत 62वें स्थान पर रहा। आंकड़ों से पता चलता है कि ब्राउजर और उनके ‘प्लग-इन्स’ की खामियों का फायदा उठाकर किए जाने वाले हमले ऑनलाइन खतरों का प्राथमिक तरीका बने हुए हैं।
कैस्परस्काई ने कहा, ‘‘फाइल रहित मैलवेयर 2025 में भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को लक्षित करने वाले सबसे खतरनाक हमलों में शामिल रहा, क्योंकि यह कंप्यूटर की मेमोरी में काम करता है और संक्रमित सिस्टम पर बहुत कम निशान छोड़ता है।’’
वैश्विक स्तर पर 2025 में दुर्भावनापूर्ण ईमेल हमलों में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कैस्परस्काई के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में लगभग हर दूसरा ईमेल ‘स्पैम’ था, जिसमें अनचाहे संदेशों के साथ ही स्कैम ईमेल, फिशिंग और मैलवेयर शामिल थे।
भाषा पाण्डेय अजय
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