विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि में अप्रैल में मामूली सुधार, ईरान युद्ध का मुद्रास्फीति पर दबाव: पीएमआई

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विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि में अप्रैल में मामूली सुधार, ईरान युद्ध का मुद्रास्फीति पर दबाव: पीएमआई

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  • Publish Date - May 4, 2026 / 12:51 PM IST,
    Updated On - May 4, 2026 / 12:51 PM IST

नयी दिल्ली, चार मई (भाषा) देश के विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में नए कारोबार की शुरुआत और उत्पादन में वृद्धि के मामले में अप्रैल में मामूली सुधार देखने को मिला, लेकिन वृद्धि दर लगभग चार वर्ष में दूसरे सबसे कमजोर स्तर से बढ़ी।

मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) मार्च के 53.9 के मुकाबले अप्रैल में 54.7 पर रहा। यह करीब चार साल में समग्र परिचालन परिस्थितियों में दूसरे सबसे धीमे सुधार को दर्शाता है।

यह सूचकांक नए ऑर्डर, उत्पादन, रोजगार, आपूर्तिकर्ताओं की आपूर्ति के समय और खरीद भंडार जैसे मानकों के आधार पर समग्र स्थिति को दर्शाता है।

पीएमआई की भाषा में सूचकांक का 50 से ऊपर होने का मतलब विस्तार है जबकि 50 से नीचे होना संकुचन को दर्शाता है।

पीएमआई के दो सबसे बड़े घटक नए ऑर्डर और उत्पादन मार्च की तुलना में बढ़े, लेकिन पिछले साढ़े तीन साल के स्तर से पीछे रहे।

एचएसबीसी की मुख्य अर्थशास्त्री (भारत) प्रांजुल भंडारी ने कहा, ‘‘ भारत का विनिर्माण पीएमआई अप्रैल में 53.9 से बढ़कर 54.7 हो गया, लेकिन यह अब भी लगभग चार साल में परिचालन स्थितियों में दूसरी सबसे धीमी सुधार दर को दर्शाता है।’’

सर्वेक्षण प्रतिभागियों ने बताया कि विज्ञापन एवं मांग की मजबूती ने बिक्री और उत्पादन को सहारा दिया लेकिन प्रतिस्पर्धा की स्थिति, पश्चिम एशिया में युद्ध और ग्राहकों द्वारा लंबित ‘कोटेशन’ मंजूर करने में हिचक के कारण वृद्धि प्रभावित हुई।

उत्पादन, नए ऑर्डर (निर्यात सहित) और रोजगार में हालांकि मध्यम वृद्धि दर्ज हुई जो विनिर्माण क्षेत्र की मजबूती को दर्शाती है।

वहीं, चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली (जनवरी-मार्च) तिमाही की शुरुआत में नए निर्यात ऑर्डर तेजी से बढ़े और वृद्धि की रफ्तार सात महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई। कंपनियों ने ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जापान, केन्या, मुख्य भूमि चीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन जैसे देशों से बेहतर मांग की जानकारी दी।

कीमतों के मोर्चे पर कंपनियों ने संकेत दिया कि पश्चिम एशिया में युद्ध से महंगाई पर ऊपर की ओर दबाव बना हुआ है। कच्चे माल की लागत और तैयार माल की कीमतें कीमतें क्रमशः 44 महीने और छह महीने में सबसे तेज दर से बढ़ीं।

एल्यूमिनियम, रसायन, विद्युत घटक, ईंधन, चमड़ा, पेट्रोलियम उत्पाद और रबर की कीमतों में वृद्धि के कारण अप्रैल में औसत लागत दबाव और बढ़ गया। सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों ने इन बढ़ोतरी को अक्सर पश्चिम एशिया युद्ध से जोड़ा।

कुल मिलाकर महंगाई दर अगस्त 2022 के बाद उच्च स्तर पर पहुंच गई। इसके बाद कंपनियों ने अपने उत्पादों की कीमतें छह महीने में सबसे ज्यादा बढ़ाईं।

रोजगार के मोर्चे पर, लंबित कार्यों में मामूली वृद्धि के बावजूद विनिर्माताओं ने पहली तिमाही की शुरुआत में अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती की। रोजगार सृजन की दर 10 महीने में सबसे मजबूत रही।

भारतीय विनिर्माता भविष्य की वृद्धि संभावनाओं को लेकर आशावादी बने हुए हैं, हालांकि सकारात्मक भावना का स्तर मार्च की तुलना में कुछ कम हुआ है। कंपनियों को उम्मीद है कि विपणन प्रयास सफल होंगे और लंबित परियोजनाओं को मंजूरी मिलेगी।

एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) को एसएंडपी ग्लोबल ने लगभग 400 विनिर्माण कंपनियों के खरीद प्रबंधकों से प्राप्त प्रश्नावली के जवाब के आधार पर तैयार किया है।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा