नयी दिल्ली, सात जनवरी (भाषा) सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था के चालू वित्त वर्ष में 7.4 प्रतिशत की मजबूत दर से बढ़ने की संभावना है जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में 6.5 प्रतिशत थी। इस तरह भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखेगा। बुधवार को आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की तरफ से जारी राष्ट्रीय आय के प्रथम अग्रिम अनुमानों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) की वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो एक साल पहले 6.4 प्रतिशत थी।
इससे पहले वित्त वर्ष 2023-24 में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, विनिर्माण क्षेत्र में जीवीए के आधार पर वृद्धि दर वित्त वर्ष 2025-26 में सात प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो 2024-25 में 4.5 प्रतिशत थी। वहीं, सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर 9.1 प्रतिशत आंकी गई है, जो पिछले वर्ष 7.2 प्रतिशत रही थी।
हालांकि कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की वृद्धि दर घटकर 3.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो एक साल पहले 4.6 प्रतिशत थी।
एनएसओ ने कहा कि स्थिर कीमतों पर वास्तविक जीडीपी 2025-26 में बढ़कर 201.90 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि 2024-25 में यह 187.97 लाख करोड़ रुपये थी।
वहीं, मौजूदा कीमतों पर जीडीपी का आकार 2025-26 में आठ प्रतिशत बढ़कर 357.14 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो 2024-25 में 330.68 लाख करोड़ रुपये थी। हालांकि सरकार ने फरवरी 2025 में पेश किए गए केंद्रीय बजट में 10.1 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया था।
प्रथम अग्रिम अनुमानों का इस्तेमाल आम तौर पर केंद्रीय बजट की तैयारी में किया जाता है। वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट एक फरवरी को पेश किए जाने की संभावना है।
अमेरिकी डॉलर के लिहाज से भारत की जीडीपी वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 3.97 लाख करोड़ डॉलर रहने का अनुमान है। इसके लिए एक डॉलर का मूल्य 90 रुपये आंका गया है।
एनएसओ का यह अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक के 7.3 प्रतिशत वृद्धि के अनुमान से थोड़ा अधिक है।
आंकड़ों के मुताबिक, निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीई) की वास्तविक वृद्धि सात प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि सकल स्थिर पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।
रेटिंग एजेंसी इक्रा के वरिष्ठ अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने इन आंकड़ों पर कहा कि गैर-कर राजस्व में बजट से अधिक प्राप्तियों और व्यय में संभावित बचत को देखते हुए सरकार के राजकोषीय घाटे के 4.4 प्रतिशत के लक्ष्य से भटकने की आशंका नहीं है।
क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि इन आंकड़ों से पता चलता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की वृद्धि गति बनी हुई है।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
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