मारुति सुजुकी का 14,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय का लक्ष्यः चेयरमैन

मारुति सुजुकी का 14,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय का लक्ष्यः चेयरमैन

मारुति सुजुकी का 14,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय का लक्ष्यः चेयरमैन
Modified Date: April 28, 2026 / 07:30 pm IST
Published Date: April 28, 2026 7:30 pm IST

नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (भाषा) देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता मारुति सुजुकी इंडिया ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रिकॉर्ड 14,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का लक्ष्य रखा है। कंपनी बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में यह निवेश कर रही है।

कंपनी के चेयरमैन आर सी भार्गव ने मंगलवार को तिमाही नतीजों पर विश्लेषकों के साथ चर्चा के दौरान कहा कि हरियाणा के खरखौदा और गुजरात के हंसलपुर में नई उत्पादन लाइनें जोड़ी जा रही हैं, जिनकी कुल क्षमता सालाना पांच लाख वाहनों के उत्पादन की होगी। इससे खासकर छोटी कारों की मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।

भार्गव ने कहा, “चालू वित्त वर्ष के लिए पूंजीगत व्यय करीब 14,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो अब तक के वर्षों में सर्वाधिक है। यह वृद्धि नई विनिर्माण इकाइयों में निवेश के कारण है, जिसमें खरखौदा में विस्तार और गुजरात में नए संयंत्र पर काम शुरू करना शामिल है।”

उन्होंने कहा कि इन नई उत्पादन लाइनों से इस वित्त वर्ष में लगभग 2.5 लाख अतिरिक्त कारों का उत्पादन संभव होगा।

भार्गव ने बताया कि कंपनी फिलहाल लगभग 100 प्रतिशत क्षमता पर काम कर रही है और उसके पास लंबित ऑर्डर भी है, जबकि डीलर स्तर पर स्टॉक काफी कम है।

कंपनी के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में उत्पादन क्षमता सीमित होने के कारण बिक्री प्रभावित हुई और वित्त वर्ष के अंत तक करीब 1.9 लाख ऑर्डर लंबित रह गए। इनमें से लगभग 1.3 लाख ऑर्डर छोटी कार वाले खंड के थे। डीलरों के पास औसतन केवल 12 दिन का स्टॉक था।

मारुति सुजुकी के वर्तमान में चार विनिर्माण संयंत्र हैं। हरियाणा के गुरुग्राम, मानेसर एवं खरखौदा के अलावा गुजरात के हंसलपुर में भी ये संयंत्र मौजूद हैं। इनकी कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता 24 लाख वाहनों की है।

कंपनी ने अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए गुजरात के साणंद स्थित खोराज इंडस्ट्रियल एस्टेट में अपने पांचवें संयंत्र के लिए जमीन चिह्नित की है। यह संयंत्र पूरी तरह चालू होने पर सालाना 10 लाख इकाइयों का उत्पादन करेगा। पहले चरण में 2.5 लाख वाहनों की क्षमता लगाने के लिए 10,189 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

वाहन उद्योग के भविष्य के रुझान पर भार्गव ने कहा कि आने वाले वर्षों में कार उद्योग में लगातार वृद्धि देखने को मिलेगी, क्योंकि मांग फिर से मजबूत हो रही है।

उन्होंने कहा कि छोटे कारों का भारत में दीर्घकालीन भविष्य है, क्योंकि बड़ी आबादी के लिए सस्ती और किफायती गाड़ियां ही व्यावहारिक विकल्प हैं।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर भार्गव ने कहा कि फिलहाल भारतीय कार बाजार पर इसका असर सीमित है। हालांकि, कच्चे माल एवं ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से लागत पर दबाव है और कंपनी समय आने पर कीमतों में बढ़ोतरी पर फैसला करेगी।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण


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