नयी दिल्ली, 21 जनवरी (भाषा) विद्युत मंत्रालय ने राष्ट्रीय विद्युत नीति (एनईपी) 2026 के मसौदे पर हितधारकों से बुधवार को सुझाव मांगे।
मंत्रालय ने कहा कि मसौदे में बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के नुकसान व कर्ज, लागत-अनुरूप न होने वाली दरों तथा अधिक ‘क्रॉस-सब्सिडी’ जैसी समस्याओं से निपटने पर जोर दिया गया है।
लागत-अनुरूप न होने वाली दर’ वह होती है जिसमें किसी उपभोक्ता वर्ग से वसूली गई दर बिजली के उत्पादन, पारेषण एवं वितरण की औसत लागत से कम होती है। वहीं ‘क्रॉस-सब्सिडी’ ऐसी व्यवस्था है जिसमें औद्योगिक, वाणिज्यिक एवं उच्च आय वाले घरेलू उपभोक्ताओं से लागत से अधिक शुल्क लेकर कृषि उपभोक्ताओं तथा कम आय वाले परिवारों को दी जाने वाली कम दरों की भरपाई की जाती है।
मंत्रालय ने बयान में कहा कि मसौदा नीति का उद्देश्य प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना, परिवर्तनीय नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी को समाहित करने के लिए ग्रिड की मजबूती सुनिश्चित करना और मांग-पक्षीय उपायों के साथ उपभोक्ता-केंद्रित सेवाएं प्रदान करना है।
हितधारक अपनी टिप्पणियां 30 दिन के भीतर प्रस्तुत कर सकते हैं।
मंत्रालय ने कहा , ‘‘ 2005 के बाद कई उपलब्धियों के बावजूद बिजली क्षेत्र, विशेषकर वितरण खंड में चुनौतियां बनी हुई हैं। उच्च नुकसान और बकाया कर्ज जैसी समस्याएं कायम हैं। कई क्षेत्रों में दरें अब भी लागत-अनुरूप नहीं हैं और अधिक ‘क्रॉस-सब्सिडी’ के कारण औद्योगिक दरें ऊंची बनी हुई हैं जिससे भारतीय उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होती है। ’’
इस पृष्ठभूमि में एनईपी 2026 ने महत्वाकांक्षी लेकिन आवश्यक लक्ष्य तय किए हैं। नीति के तहत 2030 तक प्रति व्यक्ति बिजली खपत 2,000 यूनिट (किलोवाट-घंटा) और 2047 तक 4,000 यूनिट से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह नीति भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप भी है जिनमें 2030 तक 2005 के स्तर से उत्सर्जन तीव्रता में 45 प्रतिशत की कमी और 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन हासिल करना शामिल है। इसके लिए कम-कार्बन ऊर्जा मार्गों की ओर निर्णायक बदलाव आवश्यक है।
एनईपी 2026 में इन चुनौतियों से निपटने और लक्ष्यों को हासिल करने की रणनीतियां बताई गई हैं। नीति में साइबर सुरक्षा, प्रौद्योगिकी अपनाने और कौशल विकास पर भी जोर दिया गया है।
इसके अलावा, भंडारण के एकीकरण और पुरानी इकाइयों के पुनःउपयोग के जरिये ग्रिड समर्थन बढ़ाने का भी प्रस्ताव है ताकि नवीकरणीय ऊर्जा का अधिक एकीकरण संभव हो सके।
गौरतलब है कि पहली राष्ट्रीय विद्युत नीति को फरवरी 2005 में अधिसूचित किया गया था। उसने बिजली क्षेत्र की मूलभूत चुनौतियों जैसे मांग-आपूर्ति की कमी, बिजली तक सीमित पहुंच और अपर्याप्त अवसंरचना से निपटने की दिशा में काम किया था।
भाषा निहारिका मनीषा
मनीषा