सेबी एआईएफ के लिए नियामक मंजूरी प्रक्रिया में तेजी लाने को रुपरेखा पर कर रहा गौर: पांडेय

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सेबी एआईएफ के लिए नियामक मंजूरी प्रक्रिया में तेजी लाने को रुपरेखा पर कर रहा गौर: पांडेय

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  • Publish Date - March 11, 2026 / 05:04 PM IST,
    Updated On - March 11, 2026 / 05:04 PM IST

मुंबई, 11 मार्च (भाषा) सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने बुधवार को कहा कि वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) के लिए एक नए नियामकीय ढांचे पर विचार किया जा रहा है। इससे एआईएफ योजनाओं की पेशकश में तेजी आ सकती है।

प्रस्तावित ‘लॉज एंड लॉन्च’ मॉडल के तहत कुछ एआईएफ योजनाओं को मर्चेंट बैंकर द्वारा जारी जांच-परख प्रमाणपत्रों के आधार पर पेश किया जा सकेगा, जिससे नियामक मंजूरी में लगने वाला समय कम होगा।

पांडेय ने आईवीसीए कॉन्क्लेव-2026 में कहा कि इस ढांचे का उद्देश्य कारोबार को सुगम बनाना, एआईएफ पेशकश में तेजी लाना और निजी पूंजी के तेजी से जुटाने में सहायता करना है।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित प्रणाली के तहत, कुछ विशिष्ट एआईएफ योजनाएं जांच-परख प्रमाणन के लिए मर्चेंट बैंकर पर निर्भर हो सकती हैं, जबकि केवल मान्यता प्राप्त निवेशकों के लिए योजनाओं को लाकर, एआईएफ प्रबंधक खुलासा संबंधी जांच-परख सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होगा।

नियामक ने कहा कि वह इस प्रस्ताव पर उद्योग जगत से परामर्श करेगा।

भारत में एआईएफ उद्योग का हाल के वर्षों में तेजी से विस्तार हुआ है। देश में अब 1,700 से अधिक पंजीकृत एआईएफ हैं, जिनकी कुल प्रतिबद्धताएं लगभग 15.74 लाख करोड़ रुपये और निवेश लगभग 6.45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह दिसंबर, 2025 तक पिछले पांच वर्षों में लगभग 30 प्रतिशत की संचयी सालाना वृद्धि है।

साथ ही, सेबी प्रमुख ने उद्योग के लिए प्रमुख चुनौतियों के रूप में ‘गलत बिक्री’ और ‘उपयुक्त उत्पाद’ का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि एआईएफ जानकार निवेशकों के लिए तैयार किया गया है, क्योंकि इनमें आमतौर पर गैर-तरल परिसंपत्तियां, लंबी निवेश अवधि, जटिल संरचनाएं और भिन्न जोखिम-लाभ शामिल होते हैं। परिणामस्वरूप, उच्च प्रतिफल के वादे के साथ उससे जुड़े जोखिम का स्पष्ट खुलासा होना आवश्यक है।

पांडेय ने इस बात पर भी चिंता जतायी कि क्या नवोन्मेष और उभरते क्षेत्रों में पर्याप्त पूंजी लगायी जा रही है?

उन्होंने कहा कि हालांकि एआईएफ से नवाचार और प्रारंभिक चरण के उद्यमों को वित्तपोषित करने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन आंकड़ों से पता चलता है कि 31 दिसंबर, 2025 तक एआईएफ पूंजी का केवल लगभग 205 अरब रुपये ही स्टार्टअप में निवेश किया गया था। यह इन क्षेत्रों में अधिक आवंटन की गुंजाइश को दर्शाता है।

पांडेय ने कहा कि एआईएफ के लिए मूल्यांकन में अनुशासन महत्वपूर्ण है। खासकर जब वे शुरुआती चरण और गैर-तरल संपत्तियों में निवेश करते हैं जहां विश्वसनीयता उचित और पारदर्शी मूल्य निर्धारण से शुरू होती है।

सेबी प्रमुख ने व्यापक वार्षिक गतिविधि रिपोर्ट और तर्कसंगत तिमाही फाइलिंग के माध्यम से हाल ही में सरलीकृत रिपोर्टिंग आवश्यकताओं का भी जिक्र किया, जिससे निगरानी में समझौता किए बिना अनुपालन का बोझ कम होने की उम्मीद है।

भाषा रमण अजय

अजय