नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) एकीकृत शिपिंग एवं लॉजिस्टिक्स कंपनी ए.पी मोलर-मर्स्क ने पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच जरूरी वस्तुओं की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही बनाए रखने के लिए नए माल की ढुलाई पर अस्थायी आपात बंकर अधिभार लगाने का फैसला किया है।
कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि यह अतिरिक्त शुल्क नियामकीय मंजूरी के अधीन होगा और 25 मार्च से भारत सहित पूरी दुनिया में लागू किया जाएगा।
अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है जिससे लॉजिस्टिक्स एवं ग्राहकों की आपूर्ति श्रृंखलाओं पर असर पड़ रहा है।
कंपनी ने फिलहाल संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ओमान, इराक, कुवैत, जॉर्डन, कतर, बहरीन तथा सऊदी अरब के लिए और वहां से आने-जाने वाली बुकिंग अस्थायी रूप से बंद कर दी है। हालांकि, भारत और अन्य अप्रभावित क्षेत्रों जैसे सुदूर पश्चिम एशिया और यूरोप के लिए नई बुकिंग जारी है।
कंपनी ने बताया कि दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत ईंधन की आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है और वर्तमान स्थिति ने ईंधन तक वैश्विक पहुंच को काफी प्रभावित किया है।
मौजूदा संघर्ष के कारण क्षेत्र की कई रिफाइनरियां या तो बंद हैं या कम क्षमता पर काम कर रही हैं। इससे निर्यात क्षमता सीमित हो गई है और वैश्विक ईंधन आपूर्ति श्रृंखलाओं में बड़ा व्यवधान उत्पन्न हुआ है।
कंपनी के अधिकारी ने बताया कि इस स्थिति में अस्थायी आपात बंकर अधिभार (ईबीएस) लागू करना जरूरी हो गया है जो ईंधन की उपलब्धता व लागत में आए बदलावों के प्रभाव से निपटने में मदद करेगा।
डेनमार्क स्थित मर्स्क दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी पोत परिवहन कंपनी है और भारत में भी इसकी मजबूत मौजूदगी है।
अधिभार की राशि कंटेनर के आकार (20 फुट, 40 फुट या 45 फुट), माल के प्रकार (सामान्य या रेफ्रिजरेटेड) और यात्रा की दिशा के आधार पर तय होगी। यह शुल्क 100 डॉलर से 600 डॉलर के बीच हो सकता है।
कंपनी ने बताया कि ईंधन की उपलब्धता और लागत के आधार पर इस अधिभार की हर 14 दिन में समीक्षा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर इसे बढ़ाया या घटाया जा सकता है।
भाषा निहारिका अजय
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