नयी दिल्ली, 23 जनवरी (भाषा) सरकार ने देश की आर्थिक तस्वीर को और सटीक ढंग से पेश करने के मकसद से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की तिमाही शृंखला और उप-राष्ट्रीय खातों की गणना में बदलाव पर चर्चा शुरू कर दी है। इस संबंध में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने शुक्रवार को एक चर्चा पत्र जारी किया।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रीय खातों की नई शृंखला का आधार वर्ष वित्त वर्ष 2022-23 होगा और इसे 27 फरवरी, 2026 को जारी करने की योजना है।
मंत्रालय ने कहा कि इस शृंखला के लिए गणना पद्धति में बदलाव के प्रस्तावों पर उपयोगकर्ताओं की प्रतिक्रिया और सुझाव मांगे गए हैं।
राष्ट्रीय खातों के आधार वर्ष में संशोधन को लेकर सुझाव देने के लिए मंत्रालय ने प्रोफेसर बी एन गोल्डर की अध्यक्षता में एक सलाहकार समिति बनाई है। समिति का काम नए डेटा स्रोतों को शामिल कर राष्ट्रीय खातों के अनुमान सुधारने और उनके प्रस्तुतीकरण एवं विश्लेषण के लिए प्रभावी पद्धति तय करना है।
इस सलाहकार समिति में विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, शिक्षण संस्थानों और शोध संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
मंत्रालय ने बताया कि पहले दो चर्चा पत्रों के जरिये राष्ट्रीय खातों की गणना में बदलाव के सुझाव लिए गए थे। पहला पत्र 21 नवंबर, 2025 को उत्पादन/ आय दृष्टिकोण और दूसरा पत्र 16 दिसंबर, 2025 को व्यय दृष्टिकोण पर जारी किया गया था।
अब जारी किया गया तीसरा चर्चा पत्र तिमाही जीडीपी शृंखला और उप-राष्ट्रीय खातों की गणना में प्रस्तावित बदलावों पर केंद्रित है। सभी चर्चा पत्र मंत्रालय की वेबसाइट एमओएसपीआई डॉट जीओवी डॉट इन पर उपलब्ध हैं।
मंत्रालय ने उपयोगकर्ताओं से 27 फरवरी, 2026 से पहले अपने सुझाव भेजने का अनुरोध किया है, ताकि राष्ट्रीय खातों की नई शृंखला को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया जा सके।
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प्रेम रमण
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