नयी दिल्ली, पांच अप्रैल (भाषा) मूडीज रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 6.8 प्रतिशत से घटाकर छह प्रतिशत कर दिया है। रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण भारत की वृद्धि की रफ्तार घटेगी और इससे महंगाई का जोखिम भी बढ़ेगा।
भारत पर अपनी साख परिदृश्य रिपोर्ट में मूडीज ने कहा कि लंबे समय तक व्यवधान से आने में दिनों में परिवारों के लिए खासकर रसोई गैस (एलपीजी) की कमी हो जाएगी। इसके अलावा ईंधन और परिवहन की लागत बढ़ेगी। ऐसे में जबकि भारत उर्वरकों के लिए आयात पर निर्भर है इसका प्रभाव खाद्य मुद्रास्फीति तक फैलेगा।
यह क्षेत्र भारत के कच्चे तेल के आयात का लगभग 55 प्रतिशत और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का लगभग 90 प्रतिशत से ज्यादा पूरा करता है।
मूडीज ने कहा, ‘‘हालांकि, महंगाई अभी नियंत्रण में है, लेकिन भूराजनीतिक जोखिमों ने मुद्रास्फीति के परिदृश्य को ऊपर की ओर कर दिया है।
मूडीज का अनुमान है कि 2026-27 में औसत मुद्रास्फीति 2025-26 के 2.4 प्रतिशत से बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो जाएगी।
मूडीज का मानना है कि महंगाई का जोखिम फिर से बढ़ने और वृद्धि के मजबूत बने रहने के साथ 2026-27 में नीतिगत दर रेपो को या तो स्थिर रखा जाएगा या इसमें धीरे-धीरे वृद्धि की जाएगी। हालांकि, यह भूराजनीतिक तनाव की अवधि और इसके खाद्य एवं ईंधन की मुद्रास्फीति पर पड़ने वाले असर पर निर्भर करेगा।’’
मूडीज की 31 मार्च की रिपोर्ट, जिसे पीटीआई-भाषा ने देखा है, के मुताबिक, ‘‘पश्चिम एशिया चल रहे सैन्य संघर्ष के भारत की अर्थव्यवस्था पर असर को देखते हुए हमारा अनुमान है कि 2026-27 में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर घटकर छह प्रतिशत रहेगी। रेटिंग एजेंसी ने पहले इसके 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘निजी उपभोग में कमी, औद्योगिकी गतिविधियों में सुस्ती, सकल निश्चित पूंजी सृजन में कमी, दाम बढ़ने तथा लागत बढ़ने से भारत की वृद्धि दर प्रभावित होगी।’’
पिछले महीने आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) ने अनुमान लगाया था कि भारत की जीडीपी वृद्धि दर 2025-26 के 7.6 प्रतिशत से घटकर 2026-27 में 6.1 प्रतिशत रह जाएगी । इसके अलावा ईवाई की ‘इकॉनमी वॉच’ रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर पश्चिम एशिया संघर्ष 2026-27 तक जारी रहता है, तो चालू वित्त वर्ष में भारत की वास्तवित जीडीपी वृद्धि दर करीब एक प्रतिशत घट जाएगी जबकि खुदरा मुद्रास्फीति करीब डेढ़ प्रतिशत अंक बढ़ेगी।
घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा का अनुमान है कि 2026-27 में भारत की वृद्धि दर घटकर 6.5 प्रतिशत रहेगी।
एजेंसी का अनुमान है कि माल एवं सेवाओं का निर्यात काफी हद तक स्थिर रहेगा। वहीं ऊंची जिंस कीमतों के बीच वस्तुओं का आयात बढ़ेगा। इससे भारत का चालू खाते का घाटा (कैड) बढ़ेगा।
मूडीज ने कहा कि दूसरे देशों में रहने वाले भारतीयों द्वारा देश में भेजे जाने वाले धन यानी रेमिटेंस पर भी इस संकट की वजह से असर पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि इस तरह के प्रवाह का 40 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों से आता है।
भाषा अजय
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