नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनी (यूपीआईटीएस) में इस साल 1,000 से अधिक घरेलू विक्रेता, निर्यातक, विनिर्माता और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों के साथ 600 से अधिक विदेशी खरीदार भाग लेंगे। इससे वैश्विक स्तर पर खरीद, व्यापारिक साझेदारी और निवेश के लिए एक बड़ा मंच उपलब्ध होगा। निर्यातकों के शीर्ष संगठन फियो ने मंगलवार को एक बयान में यह जानकारी दी।
उत्तर प्रदेश सरकार और फियो के सहयोग से चौथी यूपीआईटीएस प्रदर्शनी का आयोजन 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में किया जाएगा।
बयान के अनुसार, प्रदर्शनी का उद्घाटन 25 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। इसमें उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रमुख, निर्यातक और अंतरराष्ट्रीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भाग लेंगे।
इस वर्ष छह देश… जापान, रूस, वियतनाम, ऑस्ट्रिया, सिंगापुर और बेलारूस भागीदार देशों के रूप में प्रदर्शनी में हिस्सा लेंगे। इससे व्यापार, निवेश, विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और नवोन्मेष के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के अवसर मिलेंगे।
फियो के अनुसार, विदेशी खरीदारों के कार्यक्रम में भारत के मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) वाले बाजारों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जापान, दक्षिण कोरिया, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और ओमान से आए खरीदार और प्रतिनिधिमंडल इसमें शामिल होंगे।
ब्रिक्स देशों के अलावा एशिया, अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ओशिनिया के अन्य प्रमुख बाजारों की भागीदारी से भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजार तलाशने और आपूर्ति श्रृंखला को नई साझेदारी बनाने के अवसर और व्यापक होंगे।
प्रमुख विदेशी खरीदारों का एक प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात करेगा। इस दौरान निवेश के अवसरों, खरीद संबंधी जरूरतों और औद्योगिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को राज्य में बढ़ते विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र की जानकारी दी जाएगी।
यूपीआईटीएस 2026 के दौरान उत्तर प्रदेश की सूक्ष्म, लघु एवं मझोली इकाइयों (एमएसएमई), कपड़ा, चमड़ा, खाद्य प्रसंस्करण, इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, हस्तशिल्प, एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी), सेवाओं और उभरते क्षेत्रों की खूबियों को प्रदर्शित किया जाएगा।
प्रदर्शनी के बड़े पैमाने और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भागीदारी से भारतीय उद्यमों, विशेषकर एमएसएमई को सीधे वैश्विक बाजार तक पहुंच मिलने की उम्मीद है। इससे उत्तर प्रदेश को प्रतिस्पर्धी विनिर्माण, खरीद, निवेश और निर्यात केंद्र के रूप में और मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
भाषा
रमण प्रेम अजय
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