(लक्ष्मी देवी ऐरे)
गांधीनगर, तीन जुलाई (भाषा) उद्योग निकाय ‘फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया’ (एफएआई) ने कहा कि है भारत में जैव-उत्प्रेरक (बायोस्टिमुलेंट्स) जैसे खास तरह के उर्वरक की बिक्री बढ़ रही है और ऐसे उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए सही नीति की जरूरत है।
एसोसिएशन ने कहा कि मौजूदा प्रणाली मुख्य रूप से थोक उर्वरक के लिए बनाई गई है और हो सकता है कि यह नए उत्पादों को ठीक से समर्थन न कर पाए। इसलिए, वितरण प्रणाली पर फिर से विचार करने की जरूरत है।
एफएआई के प्रमुख (सांख्यिकी और आईटी) कुलदीप सती ने 2-4 जुलाई तक यहां आयोजित ‘स्पेशलिटी उर्वरक समिट एंड बी टू बी एक्सपो 2026’ (एसओएमएस 2026) में कहा, ‘‘खास तरह के उर्वरक की बिक्री बढ़ रही है और किसान जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल होने वाले ऐसे उर्वरक की अहमियत समझते हैं।’’
उन्होंने कहा कि उर्वरक का वितरण पूरी तरह से सरकार के नियंत्रण में है और सभी मुख्य और सब्सिडी वाले उर्वरक की आवाजाही पर एक ऑनलाइन वेब-आधारित प्रणाली – ‘एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली’ (आईएफएमएस) – के जरिये निगरानी रखी जाती है।
उन्होंने कहा, ‘‘मौजूदा प्रणाली मुख्य रूप से थोक उर्वरक के लिए बनाई गई है और हो सकता है कि यह नए उत्पादों को ठीक से समर्थन न कर पाए।’’
सती ने बताया कि आंकड़ों के अनुसार, पारंपरिक और खास तरह के उर्वरक बेचने वाली कंपनियों के कुल बिक्री केन्द्रों की संख्या तीन लाख है।
उन्होंने कहा कि उर्वरक वितरण प्रणाली में सुधार की जरूरत है, क्योंकि यह देश भर के 15 करोड़ से ज्यादा किसानों को समय पर पोषक तत्व उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाता है।
उन्होंने कहा कि उर्वरक वितरण में सुधार अब सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि रणनीतिक जरूरत है। साथ ही, उन्होंने कहा कि पोषक तत्वों के इस्तेमाल की क्षमता को बेहतर बनाना भविष्य में खेती के विकास का सबसे टिकाऊ रास्ता है।
सती ने कहा कि अनुमान है कि वर्ष 2050 तक भारत की आबादी मौजूदा लगभग 1.45 अरब से बढ़कर 1.7 अरब हो जाएगी, जबकि अनाज की जरूरत वर्ष 2050 तक 45 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान है, जो वर्ष 2025-26 में लगभग 37.6 करोड़ टन के मौजूदा उत्पादन के मुकाबले है।
उन्होंने कहा कि पोषक तत्वों की जरूरत मौजूदा चार करोड़ टन से बढ़कर छह करोड़ टन होने का अनुमान है; इसमें से लगभग 4.5 करोड़ टन रासायनिक उर्वरकों से और बाकी 1.5 करोड़ टन जैविक और बायोलॉजिकल स्रोतों से मिलने की उम्मीद है।
भाषा राजेश राजेश अजय
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