नयी दिल्ली, 23 अगस्त (भाषा) उद्योग जगत के हितधारकों ने कहा है कि बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा (आरई) क्षमता ने भंडारण प्रणालियों के विस्तार की तत्काल आवश्यकता पैदा कर दी है। उन्होंने बैटरी सेल कलपुर्जों के निर्माण की मौजूदा क्षमता और मांग के बीच भारी अंतर को रेखांकित किया।
उद्योग के सदस्यों ने पीटीआई-भाषा के साथ बातचीत में आयात पर निर्भरता को भंडारण की धीमी तैनाती का कारण मानने के खिलाफ भी आगाह किया है।
विशेषज्ञों की यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2026 में प्रतिस्पर्धी निविदाओं से भारत की लगभग 260 गीगावाट घंटा की अनुमानित मांग के मुकाबले घरेलू बैटरी निर्माण की हिस्सेदारी वर्तमान में एक प्रतिशत से भी कम है।
सनकाइंड इंडिया के संस्थापक और प्रबंध निदेशक हनीश गुप्ता ने कहा कि बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) और पंप भंडारण परियोजनाएं तेजी से महत्व हासिल कर रही हैं क्योंकि भारत बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने और चरम मांग के साथ सौर उत्पादन को संतुलित करने के लिए नवीकरणीय क्षमता का विस्तार कर रहा है।
प्रीमियर एनर्जीज के मुख्य कारोबार अधिकारी विनय रुस्तगी ने कहा कि बैटरियां और अन्य भंडारण प्रौद्योगिकियां सौर ऊर्जा के समय-समय पर आने वाले जोखिम को दूर करने और इसके वृद्धि की संभावनाओं को साकार करने की कुंजी हैं।
वॉक्स एनर्जी के सीईओ और सह-संस्थापक पीयूष गोयल ने कहा कि भारत की भंडारण मांग घरेलू सेल निर्माण की आपूर्ति क्षमता से काफी आगे चल रही है, और यह अंतर कुछ तिमाहियों का नहीं बल्कि वर्षों का मामला है।
भाषा पाण्डेय अजय
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