नयी दिल्ली, 11 जून (भाषा) सरकारी कंपनी नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एनएफएल) ने हाल ही में 17 लाख टन यूरिया आयात करने के लिए निविदा निकाली था। सूत्रों के मुताबिक, कंपनी को वैश्विक कारोबारी कंपनियों से 60 लाख टन से अधिक यूरिया के लिए बोलियां मिली हैं, जिसमें सबसे कम दर लगभग 445 डॉलर प्रति टन है।
वैश्विक यूरिया कीमतों में गिरावट के कारण, इस नई निविदा में दी गई दर अप्रैल में इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) द्वारा निकाली गए निविदा में बताई गई कीमतों से 50 प्रतिशत से भी कम हैं।
भारत ने पिछले वित्त वर्ष में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए एक करोड़ टन से ज्यादा यूरिया आयात किया था। 27 मई को एनएफएल ने रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग की ओर से भारत में जल्द डिलिवरी के लिए प्रिल्डया ग्रेन्युलर यूरिया (थोक) – जिसमें कम से कम 46 प्रतिशत नाइट्रोजन हो (फर्टिलाइज़र ग्रेड) – खरीदने के लिए एक वैश्विक निविदा निकाली थी।
सूत्रों ने बताया कि आठ जून को खोली गई इस निविदा को अच्छी प्रतिक्रिया मिली है, क्योंकि बोली लगाने वालों ने 60 लाख टन से ज्यादा यूरिया आपूर्ति करने की पेशकश की है।
सबसे कम बोली 445 डॉलर प्रति टन है।
सूत्रों ने कहा कि विभाग इस निविदा के तहत कितनी मात्रा में आयात करना है, इस पर अंतिम फैसला लेगा।
उन्होंने कहा कि चीन द्वारा निर्यात पर लगी पाबंदियों में ढील दिये जाने के बाद वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमतें काफी कम हो गई हैं।
उद्योग के एक अधिकारी के अनुसार, अभी साप्ताहिक दर 577 डॉलर प्रति टन है, जबकि बुधवार को दर 450-455 डॉलर प्रति टन था।
पश्चिम एशिया में संघर्ष के बाद यूरिया की कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि सरकार की उर्वरक सब्सिडी काफी बढ़ जाएगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, उर्वरक विभाग ने वित्त मंत्रालय से उर्वरक सब्सिडी को 100 प्रतिशत बढ़ाने के लिए संपर्क किया है। यह बढ़ोतरी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट में तय 1.71 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी के मुकाबले मांगी गई है।
भाषा राजेश राजेश अजय
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