परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में शांति अधिनियम के क्रियान्वयन पर नीति आयोग ने हितधारकों से की चर्चा

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परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में शांति अधिनियम के क्रियान्वयन पर नीति आयोग ने हितधारकों से की चर्चा

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  • Publish Date - July 11, 2026 / 07:53 PM IST,
    Updated On - July 11, 2026 / 07:53 PM IST

नयी दिल्ली, 11 जुलाई (भाषा) नीति आयोग ने निजी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के स्वामित्व और संचालन की अनुमति देने वाले ‘शांति अधिनियम, 2025’ के क्रियान्वयन को लेकर शनिवार को हितधारकों के साथ परामर्श बैठक की।

आयोग ने एक बयान में कहा कि बैठक में सरकार, अनुसंधान संस्थानों एवं उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अधिनियम के परिचालन ढांचे पर विचार-विमर्श किया।

बयान के मुताबिक, चर्चा शांति अधिनियम के मसौदा नियमों, विनियमों और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से जुड़े प्रावधानों पर केंद्रित रही। इसमें बताया गया कि घरेलू हितों की सुरक्षा करते हुए विदेशी पूंजी किस तरह आकर्षित की जा सकती है।

परामर्श बैठक में अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक वित्तीय व्यवस्थाओं और जोखिम कम करने के उपायों पर भी चर्चा की गई। इसके अलावा दीर्घकालिक परमाणु परियोजनाओं के लिए उपयुक्त बीमा व्यवस्था, जन जागरूकता बढ़ाने, स्थानीय समुदायों में विश्वास कायम करने और परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की व्यापक स्वीकार्यता सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों पर भी विचार हुआ।

नीति आयोग ने कहा कि चर्चा का मुख्य जोर अधिनियम के क्रियान्वयन चरण पर रहा, जिसमें घरेलू विनिर्माण क्षमता को मजबूत करने, परिचालन तैयारियों को सुनिश्चित करने और इस क्षेत्र के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया गया।

बैठक में आपूर्ति शृंखला को अधिक मजबूत बनाने, औद्योगिक विस्तार के लिए विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम तैयार करने और कुशल मानव संसाधन विकसित करने के उपायों पर भी चर्चा की गई।

आयोग ने कहा कि हितधारकों ने तीनों प्रमुख क्षेत्रों से जुड़े विभिन्न सुझाव दिए, जो इस अधिनियम के क्रियान्वयन ढांचे को और मजबूत करने में उपयोगी होंगे।

सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (शांति) अधिनियम, 2025 परमाणु क्षेत्र से जुड़े कानूनों के आधुनिकीकरण की पहल का हिस्सा है। इसने परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और नागरिक परमाणु क्षति दायित्व (सीएलएनडी) अधिनियम, 2010 का स्थान लिया है।

भाषा योगेश प्रेम

प्रेम