नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) से मंजूरी मिलने के बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निदेशक मंडल अपने बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू करने के लिए छह फरवरी को बैठक करेगा।
बाजार सूत्रों ने बुधवार को बताया कि इस बैठक के दौरान बोर्ड द्वारा एक विशेष ‘आईपीओ समिति’ का गठन किए जाने की उम्मीद है, जो शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने (लिस्टिंग) की पूरी प्रक्रिया की देखरेख करने वाली केंद्रीय समिति के रूप में कार्य करेगी।
सूत्रों ने बताया कि इस समिति को ‘लिस्टिंग’ की प्रक्रियाओं को परिभाषित करने और दस्तावेजों के मसौदे (डीआरएचपी) को तैयार करने के लिए जरूरी मर्चेंट बैंकर और कानूनी सलाहकारों की नियुक्ति के मानदंड तय करने का जिम्मा सौंपा जाएगा।
इसके साथ ही, बोर्ड बैठक में दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तिमाही और नौ महीनों के बिना ऑडिट वाले वित्तीय नतीजों को परखा जाएगा और उन्हें मंजूरी दी जाएगी।
नियमों से जुड़ी दिक्कतों और ‘को-लोकेशन’ (सर्वर से जुड़ी सुविधा) विवाद की वजह से पिछले दस साल से अटके इस आईपीओ के लिए शुक्रवार को मार्ग प्रशस्त हो गया, जब बाजार नियामक सेबी ने एनएसई को अपनी मंजूरी दे दी।
देश के सबसे बड़े शेयर बाजार एनएसई की सूचीबद्धता की योजना 2016 से ही अधर में लटकी हुई थी। उस समय एक्सचेंज ने मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी बेचकर (ओएफएस) करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए शुरुआती दस्तावेज जमा किए थे।
हालांकि, कामकाज के तौर-तरीकों में कमियों और ‘को-लोकेशन’ मामले से जुड़ी चिंताओं के कारण सेबी ने इसकी मंजूरी रोक दी थी। तब से एनएसई ने अनुमति के लिए कई बार नियामक से संपर्क किया।
भाषा सुमित अजय
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