कम बारिश वाले इलाकों में खरीफ बुवाई पर निगाह रखें अधिकारी : चौहान

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कम बारिश वाले इलाकों में खरीफ बुवाई पर निगाह रखें अधिकारी : चौहान

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  • Publish Date - July 21, 2026 / 08:18 PM IST,
    Updated On - July 21, 2026 / 08:18 PM IST

नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को अधिकारियों को कम बारिश वाले जिलों में खरीफ बुवाई की प्रगति पर बारीकी से नजर रखने और बीज व उर्वरक जैसी जरूरी चीजों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

एक जून से 15 जुलाई, 2026 की अवधि के दौरान, देश में औसत बारिश सामान्य से 23 प्रतिशत कम दर्ज की गई।

एक सरकारी बयान के अनुसार, चौहान ने खरीफ फसलों की बुवाई की प्रगति, अल-नीनो के असर और मानसून की मौजूदा स्थिति तथा कम बारिश वाले संवेदनशील जिलों की स्थिति का आकलन करने के लिए विस्तृत समीक्षा की। बीज और उर्वरक की उपलब्धता के साथ-साथ जलाशयों में पानी के भंडारण की भी समीक्षा की गई।

मंत्री ने अधिकारियों को कम बारिश वाले इलाकों पर विशेष नजर रखने और राज्यों के साथ लगातार तालमेल बनाए रखने का निर्देश दिया।

उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि वे जरूरत के अनुसार राज्यों के साथ तालमेल बैठाकर उचित कृषि प्रबंधन और आपातकालीन उपाय सुनिश्चित करें। 17 जुलाई तक खरीफ फसलों की कुल बुवाई का रकबा 658.19 लाख हेक्टेयर था, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 700.47 लाख हेक्टेयर था।

मंत्रालय ने माना कि पिछले साल की तुलना में अब तक कुल बुवाई का रकबा कम है, लेकिन कई राज्यों में धान, दलहन और अन्य फसलों की बुवाई में सकारात्मक प्रगति हुई है।

चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य सरकारों के साथ दलहन, तिलहन और कपास मिशन द्वारा साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएं और जमीनी स्तर से मिली प्रतिक्रिया के आधार पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

बैठक में भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के पूर्वानुमान, संभावित अल-नीनो स्थितियों और बारिश के लिहाज से 270 संवेदनशील जिलों की स्थिति की समीक्षा की गई।

मानसून और बारिश की स्थिति पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई। विभिन्न राज्यों में बारिश की स्थिति, कम और ज्यादा बारिश वाले इलाकों, फसलों की बुवाई की प्रगति और एनडीवीआई (नॉर्मलाइज्ड डिफरेंस वेजिटेशन इंडेक्स) जैसे संकेतकों के आधार पर फसलों की स्थिति की भी समीक्षा की गई।

बैठक में मानसून की प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ खरीफ सत्र के दौरान कृषि गतिविधियों के लिए अनुकूल परिस्थितियों पर भी चर्चा की गई।

मंत्रालय ने कहा कि पूरे देश में मानसून के फैलने से ज्यादातर राज्यों में खरीफ फसलों की बुवाई के लिए अनुकूल हालात बन गए हैं।

बैठक के दौरान, खाद (खासकर यूरिया) और बीजों की उपलब्धता और वितरण की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि खरीफ 2026 के लिए खाद और बीजों की पर्याप्त आपूर्ति है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जमीनी हकीकत की जानकारी कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) और राज्य सरकारों से ली जानी चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे यह पक्का करें कि किसानों को उनकी जरूरत के हिसाब से खाद मिले। किसी भी तरह की कमी होने पर तुरंत समाधान किया जाना चाहिए।

समीक्षा बैठक में चौहान ने निर्देश दिया कि राज्यों के साथ तालमेल बैठाकर खरीफ सत्र के दौरान खेती-बाड़ी की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाए। उन्होंने किसानों के लिए वैज्ञानिक सलाह, मौसम पर आधारित खेती के प्रबंधन और योजनाओं को असरदार ढंग से लागू करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के हितों की रक्षा करने और खेती का उत्पादन बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय