पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दाम फिर बढ़े, 10 दिन में लगभग पांच रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी

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पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दाम फिर बढ़े, 10 दिन में लगभग पांच रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी

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  • Publish Date - May 23, 2026 / 02:53 PM IST,
    Updated On - May 23, 2026 / 02:53 PM IST

(तस्वीर के साथ)

नयी दिल्ली, 23 मई (भाषा) पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 10 दिनों से भी कम समय में शनिवार को तीसरी बार बढ़ोतरी की गई। पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे लीटर जबकि डीजल के दाम में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है।

ताजा बढ़ोतरी के बाद 10 दिनों के भीतर पेट्रोल एवं डीजल के दाम देशभर में लगभग पांच रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं।

इसके साथ ही वाहन ईंधन के तौर पर इस्तेमाल होने वाले सीएनजी की कीमत में भी एक रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई है। हाल के दिनों में तीसरी बार हुई बढ़ोतरी के बाद सीएनजी के दाम कुल चार रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ चुके हैं।

पश्चिम एशिया संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के साथ सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियां ईंधन के खुदरा दाम बढ़ा रही हैं। हालांकि इसके पहले लंबे समय पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े थे।

पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में यह वृद्धि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, रिफाइनिंग मार्जिन में कमी और रुपये के कमजोर होने के कारण हुई है।

मूल्यवृद्धि के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 98.64 रुपये प्रति लीटर से 87 पैसे बढ़कर 99.51 रुपये प्रति लीटर हो गई। इसी तरह, डीजल की कीमत 91.58 रुपये प्रति लीटर से 91 पैसे बढ़कर 92.49 रुपये प्रति लीटर हो गई।

इससे पहले 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन रुपये प्रति लीटर और 19 मई को लगभग 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी।

इसके साथ सीएनजी के दाम भी बढ़ाए गए हैं। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) की वेबसाइट के मुताबिक, दिल्ली में सीएनजी की कीमत 80.09 रुपये से बढ़कर 81.09 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है।

इसके साथ दिल्ली के आसपास के शहरों में भी सीएनजी के दाम बढ़ा दिए गए हैं।

यह सीएनजी कीमतों में 10 दिनों से भी कम समय में हुई तीसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले 15 मई को दो रुपये प्रति किलोग्राम और 17 मई को एक रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई थी। इस तरह कुल बढ़ोतरी चार रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है।

तीनों मौकों पर सरकारी तेल कंपनियों की घोषित मूल्य वृद्धि के साथ नायरा एनर्जी जैसे निजी ईंधन खुदरा विक्रेताओं ने भी पेट्रोल और डीजल के दाम लगभग उतने ही बढ़ाए हैं। कुछ निजी पेट्रोलियम कंपनियों ने 15 मई के पहले भी पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए थे।

नायरा एनर्जी ने मार्च में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में क्रमशः पांच रुपये और तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की थी। वहीं, शेल कंपनी ने एक अप्रैल से पेट्रोल में 7.41 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 25 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की थी।

हालांकि, रिलायंस इंडस्ट्रीज लि. और बीपी पीएलसी के संयुक्त ईंधन खुदरा उद्यम जियो-बीपी ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के अनुरूप ही अपने पेट्रोल पंपों पर कीमतों में बदलाव किया है।

शनिवार की वृद्धि के बाद, मुंबई में सार्वजनिक तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल अब 108.49 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.02 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि कोलकाता में इनकी कीमतें बढ़कर क्रमशः 110.64 रुपये और 97.02 रुपये हो गई हैं। चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 105.31 रुपये और डीजल की कीमत 96.98 रुपये है।

स्थानीय करों (वैट) के कारण राज्यों में पेट्रोल एवं डीजल की कीमतें अलग-अलग हैं।

सार्वजनिक क्षेत्र की इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (एचपीसीएल) की देश के ईंधन बाजार में संयुक्त रूप से करीब 90 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

अमेरिका और इजराइल की तरफ से 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमले के बाद दोनों पक्षों में छिड़े संघर्ष से वैश्विक तेल की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य अवरुद्ध हो गया है। इससे कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई हैं।

खुदरा ईंधन विक्रेताओं ने इस बढ़ती लागत के बावजूद पेट्रोल पंपों पर कीमतें कम रखी थीं। सरकार ने इसे उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया कदम बताया था।

हालांकि, विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के संपन्न होने का इंतजार कर रही थी।

इस बीच, सरकार का कहना है कि कीमतों में इस वृद्धि के बावजूद, खुदरा ईंधन विक्रेताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि 15 मई की वृद्धि से नुकसान में एक चौथाई की कमी आई है और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां अब भी प्रतिदिन लगभग 750 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुताबिक, पिछली बढ़ोतरी के बाद भी तेल विपणन कंपनियां पेट्रोल पर लगभग 10 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर का घाटा झेल रही थीं।

बहरहाल, पेट्रोल और डीजल की कीमतें अब मई, 2022 के बाद से उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दो रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी। आखिरी बार कीमतों में वृद्धि अप्रैल 2022 में हुई थी।

ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी भारत के तेल आयात बिल को नियंत्रित करने और ईंधन की खपत को कम करने के लिए सरकार के व्यापक प्रयासों के बीच हुई है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए विदेशी मुद्रा बचाने के मकसद से ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग, सोने की खरीद और विदेश यात्रा को स्थगित करने जैसे उपायों का आह्वान किया है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ रहा है और लगातार तीसरे वर्ष चालू खाते का घाटा बढ़ने का खतरा है।

कई राज्य सरकारों ने पहले ही अपने विभागों को यात्रा सीमित करने, बैठकों में कटौती करने और कम कर्मचारियों के साथ कार्यालय चलाने के निर्देश दिए हैं।

पेट्रोलियम उद्योग का कहना है कि ताजा मूल्य संशोधन सोच-विचार कर तेल कंपनियों पर दबाव को कुछ कम करने के लिए किए गए हैं, ताकि मुद्रास्फीति में अचानक वृद्धि न हो।

हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ेगा।

भारत में खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में बढ़कर 3.48 प्रतिशत हो गई, जो मार्च में 3.40 प्रतिशत थी। वहीं, थोक मुद्रास्फीति मुख्य रूप से ईंधन और ऊर्जा की बढ़ती लागतों के कारण 42 महीनों के उच्चतम स्तर 8.3 प्रतिशत पर पहुंच गई।

भाषा योगेश प्रेम

प्रेम