Petrol Diesel Price 06 April 2026: 107 रुपए तक पहुंचा पेट्रोल का रेट, डीजल भी 90 पार, जानिए आज भारत में कितना बदल गया ईंधन का दाम
Petrol Diesel Price 06 April 2026: 107 रुपए तक पहुंचा पेट्रोल का रेट, डीजल भी 90 पार, जानिए आज भारत में कितना बदल गया ईंधन का दाम
Petrol Diesel Price 06 April 2026: 107 रुपए तक पहुंचा पेट्रोल का रेट, डीजल भी 90 पार, जानिए आज भारत में कितना बदल गया ईंधन का दाम / Image: IBC24 Customized Petrol Diesel Price 06 April 2026: 107 रुपए तक पहुंचा पेट्रोल का रेट, डीजल भी 90 पार, जानिए आज भारत में कितना बदल गया ईंधन का दाम / Image: IBC24 Customized
- 6 अप्रैल का पेट्रोल-डीजल का रेट
- आज पेट्रोल 107 रुपए लीटर
- डीजल की कीमत भी 90 रुपए प्रति लीटर से पार
नई दिल्ली: Petrol Diesel Price 06 April 2026 सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। हालांकि इससे ईंधन के खुदरा दाम में कोई बदलाव नहीं होगा क्योंकि कंपनियां इसका उपयोग कच्चे माल की बढ़ी हुई लागत का भरपाई के लिए करेंगी। इस कटौती से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में होने वाली उस वृद्धि को टाल दिया गया है जो पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि को देखते हुए आवश्यक हो गई थी।
उत्पाद शुल्क में 10-10 रुपए प्रति लीटर कटौती
Petrol Diesel Price 06 April 2026 बीते बृहस्पतिवार देर रात जारी एक अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) 13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर तीन रुपए कर दिया गया है, जबकि डीजल पर इसे 10 रुपए से घटाकर शून्य कर दिया गया है। हालांकि, इस कटौती से पेट्रोल पंप पर कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा, क्योंकि इसे तेल कंपनियों के घाटे की भरपाई के लिए समायोजित किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने डीजल के निर्यात पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और विमान ईंधन (एटीएफ) पर 29.50 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क (विंडफॉल टैक्स) लगा दिया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रिफाइनरी कंपनियों के ‘अप्रत्याशित लाभ’ पर लगाम लगाने के लिए जुलाई 2022 में पहली बार यह (विंडफॉल टैक्स) कर लगाया गया था, जिसे दिसंबर 2024 में हटा लिया गया था। हालांकि, पिछली बार के विपरीत तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) जैसी घरेलू कच्चा तेल उत्पादक कंपनियों पर कोई अप्रत्याशित लाभ कर नहीं लगाया गया है।
1,500 करोड़ रुपए का लाभ
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि निर्यात पर इस अप्रत्याशित लाभ कर से सरकार को पहले पखवाड़े में लगभग 1,500 करोड़ रुपए का लाभ होगा, जबकि उत्पाद शुल्क में कटौती के कारण सरकार को 7,000 करोड़ रुपए से अधिक के राजस्व का त्याग करना होगा। उन्होंने निर्यात कर लगाने का तर्क देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल ने रिफाइनरी कंपनियों के लिए निर्यात को अधिक आकर्षक बना दिया था। सरकार के इस कदम से घरेलू खपत के लिए ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
हर 15 दिन में समीक्षा की जाएगी
चतुर्वेदी ने कहा कि निर्यात कर की हर 15 दिन में समीक्षा की जाएगी, जैसा कि पहले किया जाता रहा है ताकि शुल्क को अंतरराष्ट्रीय बाजार की मौजूदा दरों के अनुरूप रखा जा सके। उन्होंने बताया कि इस कटौती के बाद पेट्रोल पर प्रभावी उत्पाद शुल्क 21.90 रुपए से घटकर 11.90 रुपए प्रति लीटर रह गया है, जबकि डीजल पर यह 17.80 रुपये से घटकर 7.80 रुपए प्रति लीटर हो गया है।’ पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि पेट्रोल और डीजल बनाने के मुख्य कच्चे माल यानी कच्चे तेल की कीमतें पश्चिम एशिया संकट से पहले लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं।
सरकार के पास थे दो विकल्प
उन्होंने कहा, ‘सरकार के पास दो विकल्प थे – या तो कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जाए या उत्पाद शुल्क घटाकर खुद नुकसान सहा जाए। सरकार ने दूसरा विकल्प चुना।’ शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि रिफाइनरी कंपनियों के लिए 2022 का वह नियम अब भी प्रभावी है, जिसके तहत उन्हें अपने पेट्रोल निर्यात का 50 प्रतिशत और डीजल निर्यात का 30 प्रतिशत हिस्सा पहले घरेलू बाजार में बेचना अनिवार्य है। यह कर सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों द्वारा नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका को किए जाने वाले निर्यात और विदेशी उड़ानों को दिए जाने वाले एटीएफ पर लागू नहीं होगा।
एलपीजी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई
मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम एशिया के युद्ध ने न केवल तेल की कीमतों को बढ़ाया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को भी बाधित किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में बाधा आने से कच्चे तेल के साथ-साथ एलपीजी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। इस कमी को पूरा करने और घरेलू किल्लत को रोकने के लिए सरकारी तेल कंपनियों ने ठोस कदम उठाए हैं। इन कंपनियों ने पेट्रोकेमिकल्स के निर्माण में प्रयुक्त होने वाली अपनी उत्पादन इकाइयों को एलपीजी की ओर केंद्रित कर दिया है, जिससे घरेलू रसोई गैस के उत्पादन में 40 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
| राज्य / केंद्र शासित प्रदेश | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीज़ल (₹/लीटर) |
|---|---|---|
| आंध्र प्रदेश | ₹109.56 | ₹96.17 |
| अरुणाचल प्रदेश | ₹93.48 | ₹80.16 |
| असम | ₹96.38 | ₹88.42 |
| बिहार | ₹107.17 | ₹92.37 |
| छत्तीसगढ़ | ₹103.34 | ₹93.33 |
| दिल्ली | ₹94.77 | ₹87.67 |
| गोवा | ₹97.30 | ₹89.70 |
| गुजरात | ₹94.95 | ₹90.70 |
| हरियाणा | ₹94.30 | ₹87.10 |
| हिमाचल प्रदेश | ₹94.87 | ₹86.40 |
| जम्मू-कश्मीर | ₹100.70 | ₹86.90 |
| झारखंड | ₹97.89 | ₹93.31 |
| कर्नाटक | ₹102.92 | ₹91.50 |
| केरल | ₹107.30 | ₹95.25 |
| मध्य प्रदेश | ₹106.63 | ₹92.80 |
| महाराष्ट्र | ₹103.54 | ₹91.33 |
| ओडिशा | ₹101.99 | ₹93.56 |
| पंजाब | ₹97.94 | ₹87.75 |
| राजस्थान | ₹105.57 | ₹91.03 |
| तमिलनाडु | ₹100.84 | ₹93.42 |
| तेलंगाना | ₹106.89 | ₹96.27 |
| उत्तर प्रदेश | ₹94.65 | ₹87.76 |
| पश्चिम बंगाल | ₹105.45 | ₹92.76 |
| अंडमान और निकोबार | ₹82.46 | ₹78.01 |
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