दवा उद्योग गुणवत्ता एवं नवाचार से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करे : नड्डा

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दवा उद्योग गुणवत्ता एवं नवाचार से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करे : नड्डा

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  • Publish Date - February 23, 2026 / 05:09 PM IST,
    Updated On - February 23, 2026 / 05:09 PM IST

मुंबई, 23 फरवरी (भाषा) केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे. पी. नड्डा ने सोमवार को घरेलू औषधि उद्योग से कहा कि वह पुनर्गठित हो रही वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को केवल उत्पादन क्षमता के आधार पर नहीं बल्कि गुणवत्ता, विश्वसनीयता एवं नवाचार के साथ नेतृत्व दे।

यहां आयोजित 11वें ‘ग्लोबल फार्मास्युटिकल क्वालिटी समिट’ को ऑनलाइन संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य और कोविड-19 वैश्विक महामारी के बाद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं नए मॉडल की ओर बढ़ रही हैं जो एकल स्रोत पर निर्भरता कम कर विविध भौगोलिक क्षेत्रों में नए अवसर उत्पन्न कर रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का पुनर्निर्माण हो रहा है, तो भारत को केवल व्यापकता के आधार पर नहीं बल्कि गुणवत्ता, विश्वसनीयता एवं नवाचार के साथ उन्हें आधार प्रदान करना चाहिए।’’

नड्डा ने कहा कि भारत उभरती प्रौद्योगिकियों को जिम्मेदारी से अपना रहा है और कृत्रिम मेधा (एआई) का उपयोग रोगों की शीघ्र पहचान, पूर्वानुमान आधारित निदान और बेहतर पहुंच के लिए किया जा रहा है।

नड्डा ने कहा कि दशकों से भारत को दुनिया की ‘फार्मेसी’ के रूप में पहचाना जाता रहा है और वर्तमान सरकार के तहत देश अब ‘‘दुनिया का नवप्रवर्तक’’ बनने की ओर अग्रसर है जहां स्वास्थ्य सुरक्षा, विनिर्माण मजबूती और वैज्ञानिक उत्कृष्टता राष्ट्रीय विकास के केंद्र में हैं।

नड्डा ने बताया कि 10,000 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली ‘बायोफार्मा शक्ति पहल’ भारत को वैश्विक जैव-औषधि विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। इससे घरेलू उत्पादन सुदृढ़ होगा, अनुसंधान क्षमता बढ़ेगी, 1,000 से अधिक मान्यता प्राप्त ‘क्लीनिकल ट्रायल’ क्षत्रों का सृजन होगा और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन को वैश्विक मानकों के अनुरूप वैज्ञानिक समीक्षा तंत्र के साथ मजबूत किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि 5,000 करोड़ रुपये की पीआरआईपी (दवा-चिकित्सकीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार प्रोत्साहन) योजना नई दवाओं, जटिल जेनेरिक, टीकों एवं उन्नत चिकित्सकीय प्रौद्योगिकियों में नवाचार को बढ़ावा दे रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘ बुनियादी ढांचे में निवेश के साथ-साथ लोगों, प्रणालियों और नेतृत्व में निवेश भी जरूरी है। कच्चे माल की खरीद से लेकर अंतिम उत्पाद जारी करने तक हर चरण में ‘गुणवत्ता-प्रथम’ सोच ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा बनाए रखने का एकमात्र मार्ग है।’’

भाषा निहारिका अजय

अजय