नयी दिल्ली, 28 जुलाई (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पीएसयू) ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से बाह्य वाणिज्यिक कर्ज (ईसीबी) के लिए रियायती डॉलर-रुपया अदला-बदली सुविधा को तीन महीने बढ़ाकर मार्च, 2027 तक करने का अनुरोध किया है। सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों ने कहा कि इन सार्वजनिक कंपनियों की पूंजी जरूरत का बड़ा हिस्सा वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में आता है। लिहाजा इस व्यवस्था को मार्च, 2027 तक बढ़ाया जाना चाहिए।
आरबीआई ने जून में पीएसयू को सस्ती मुद्रा हेजिंग सुविधा देने के लिए विशेष डॉलर-रुपया विदेशी मुद्रा अदला-बदली सुविधा शुरू की थी। यह सुविधा फिलहाल 31 दिसंबर, 2026 तक उपलब्ध है।
सूत्रों का कहना है कि इसकी समयसीमा बढ़ने से पीएसयू को विदेशी मुद्रा में अधिक धन जुटाने और पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी को मदद मिलेगी।
एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एफसीएनआर (बी) जमा 65-70 अरब डॉलर के दायरे में रह सकते हैं, जबकि विदेशी मुद्रा उधारी और ईसीबी समेत कुल राशि 80-85 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।
आरबीआई द्वारा ब्याज दर सीमा हटाने के बाद प्रवासी भारतीयों, भारत के विदेशी नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों से विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करने की कोशिश तेज हुई है। यह विशेष सुविधा 30 सितंबर तक खुली है, जबकि ईसीबी और विदेशी मुद्रा उधारी के लिए समयसीमा 31 दिसंबर, 2026 तक निर्धारित है।
वित्त वर्ष 2025-26 में एफसीएनआर (बी) जमा का शुद्ध प्रवाह घटकर 94.6 करोड़ डॉलर रह गया, जो पिछले वर्ष 7.1 अरब डॉलर था।
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प्रेम अजय
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