मुंबई, पांच जून (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर शुक्रवार को 5.1 प्रतिशत कर दिया। पहले इसके 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। इसका मुख्य कारण ईंधन की बढ़ती कीमतों से कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी है।
पेट्रोल की खुदरा कीमतों में मई से अब तक कुल 7.4 प्रतिशत और डीजल में 8.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
आरबीआई ने मौद्रिक नीति बयान में कहा कि इस बढ़ोतरी का कुल महंगाई पर करीब 0.36 प्रतिशत का सीधा असर पड़ेगा। इसके साथ दूसरे दौर के प्रभाव आने वाले महीनों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति में दिखाई देंगे।
इसमें कहा गया कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का असर वाणिज्यिक एलपीजी, औद्योगिक कच्चे माल, रसायन, रबड़ और प्लास्टिक उत्पादों जैसे अन्य कच्चे माल पर भी दिख रहा है। साथ ही, कच्चे माल की लागत बढ़ने के दूसरे चरण के प्रभाव आगे चलकर महंगाई पर दबाव डाल सकते हैं।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जून मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, जिंस कीमतों में झटके, मानसून को लेकर अनिश्चितता और अल नीनो जैसी परिस्थितियों के कारण महंगाई बढ़ने का जोखिम बना हुआ है।
फरवरी में 3.2 प्रतिशत से थोड़ा बढ़ने के बावजूद मार्च और अप्रैल 2026 में कुल खुदरा महंगाई लक्ष्य से नीचे (क्रमशः 3.4 प्रतिशत और 3.5 प्रतिशत) रही।
खाद्य महंगाई में कुछ बढ़ोतरी हुई, जबकि मार्च और अप्रैल में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहने से ईंधन की महंगाई दर नियंत्रित रही। मुख्य महंगाई मार्च-अप्रैल के दौरान 3.7 प्रतिशत पर स्थिर रही।
कीमती धातुओं को छोड़कर मुख्य महंगाई इसी अवधि में और कम होकर 2.1-2.2 प्रतिशत रही।
मल्होत्रा ने कहा, ‘‘ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें (भारत पर भार) अप्रैल-मई, 2026 के दौरान औसतन लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल रही हैं। ऐसे संकेत हैं कि 2026-27 में औसत कीमतें पिछली नीति में अनुमानित स्तर से काफी अधिक रहेंगी।’’
उन्होंने कहा कि ऊर्जा की ऊंची कीमतों और कई कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी के कारण अप्रैल, 2026 में थोक महंगाई (डब्ल्यूपीआई) में तेज उछाल देखा गया।
तिमाही आधार पर खुदरा महंगाई का अनुमान पहली तिमाही में 4.2 प्रतिशत, दूसरी में 5.1 प्रतिशत, तीसरी में 5.9 प्रतिशत और चौथी में 5.4 प्रतिशत लगाया गया है। 2026-27 के लिए कुल महंगाई 4.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
आरबीआई ने यह भी कहा कि खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार और जलाशयों का संतोषजनक स्तर कुछ राहत प्रदान करता है।
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कम रहने के अनुमान और अल नीनो के कारण खाद्य परिदृश्य अनिश्चित बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ने के जोखिम बढ़े हैं लेकिन मौद्रिक नीति समिति ने अधिक स्पष्टता आने तक इंतजार करना उचित समझा है।
भाषा निहारिका अजय
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