(तस्वीर के साथ)
मुंबई, पांच जून (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा कि पहले से घोषित दर से अधिक ब्याज देकर जमा आकर्षित करना केंद्रीय बैंक को स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने हालांकि एचडीएफसी बैंक से जुड़े मामले पर विशिष्ट रूप से टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। आरोप है कि देश के सबसे बड़े निजी बैंक ने बड़ी जमा राशि जुटाने के लिए अतिरिक्त भुगतान किया एवं उसे विपणन खर्च के रूप में दिखाया।
एचडीएफसी बैंक ने इन आरोपों से इनकार किया है, जबकि खबरों में दावा किया गया है कि कई बैंक जमा जुटाने के लिए ऐसे तरीके अपनाते हैं।
मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई जमा पर अलग-अलग ब्याज दर की अनुमति देता है जिसमें वरिष्ठ नागरिकों को अधिक ब्याज दिया जा सकता है और जमा की अवधि के आधार पर दरें अलग हो सकती हैं।
गवर्नर ने कहा, ‘‘ उन्हें (बैंकों को) इसे प्रदर्शित करना होता है। इसके अलावा कोई भी अतिरिक्त दर देना निश्चित रूप से स्वीकार्य नहीं है।’’
उन्होंने कहा कि जमा जुटाने के लिए बैंकों के बीच प्रतिस्पर्धा अच्छी बात है, लेकिन उन्हें पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए।
इस बीच, उच्च श्रेणी वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) को लेकर पूछे गए सवाल पर गवर्नर ने कहा कि आरबीआई जल्द ही इस सूची को अद्यतन करेगा। नई सूची जारी होने तक मौजूदा सूची जारी रहेगी।
मल्होत्रा ने एक प्रश्न के उस हिस्से का उत्तर देने से इनकार कर दिया जिसमें एक प्रमुख निवेश कंपनी द्वारा पंजीकरण रद्द करने की याचिका का भी उल्लेख किया गया था।
भाषा निहारिका अजय
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