नयी दिल्ली, पांच जून (भाषा) सरकार के विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के लिए सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर में छूट देने के कदम से भारत सरकार के बॉन्ड अधिक आकर्षक और प्रतिस्पर्धी बनेंगे। विशेषज्ञों ने यह बात कही है।
सरकार ने विदेशी निवेशकों को डॉलर प्रवाह आकर्षित करने के उद्देश्य से शुक्रवार को एक अध्यादेश के माध्यम से यह कर छूट लागू की है।
नांगिया ग्लोबल के भागीदार सुनील गिडवानी ने कहा, ‘अन्य प्रमुख बॉन्ड बाजारों की तुलना में भारतीय सरकारी बॉन्ड कम प्रतिस्पर्धी रहे हैं। चूंकि भारत वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों में अधिक गहराई से शामिल हो रहा है और स्थिर दीर्घकालिक विदेशी पूंजी की तलाश में है, इसलिए यह कर छूट बिल्कुल सही समय पर दी गई है।’
उन्होंने कहा कि इससे कर के बाद मिलने वाली आय बेहतर होगी और निवेश प्रक्रिया अधिक सरल बनेगी। इसके साथ ही यह उपाय सूचकांक आधारित निवेश, ‘यूरोक्लियर’ जैसी निपटान व्यवस्था और विदेशी पोर्टफोलियो पुनर्संतुलन को भी सुगम बनाएगा।
उन्होंने कहा कि समय के साथ यह कदम निवेशकों के आधार का विस्तार करेगा और निष्क्रिय निवेशकों को भी आकर्षित करेगा, जिससे भारत के बॉन्ड बाजार में स्थायी पूंजी प्रवाह को समर्थन मिलेगा।
डेलॉयट इंडिया के भागीदार राजेश एच. गांधी ने कहा कि इस कदम से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पर मिलने वाली आय 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। इससे भारत में बॉन्ड अन्य देशों के सरकारी बॉन्ड से अधिक आकर्षक हो जाएंगे।
सरकार की पांच जून की राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, आयकर अधिनियम में संशोधन करने के लिए अध्यादेश जारी किया है। इसके तहत एक अप्रैल से सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री, विनिमय या हस्तांतरण से होने वाली ब्याज आय एवं पूंजीगत लाभ पर कर छूट प्रदान की गई है।
प्राइस वॉटरहाउस एंड कंपनी एलएलपी के भागीदार नेहल संपत ने कहा कि यह छूट कुछ निर्धारित सूचना संबंधी शर्तों के अधीन होगी, जो संभवतः प्रक्रियात्मक होंगी।
उन्होंने कहा कि इस कदम से वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों में भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों की भागीदारी बढ़ाने में मदद मिल सकती है, जिससे भविष्य में भारत में अधिक विदेशी निवेश आने की संभावना है।
भाषा
योगेश अजय
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