रिलायंस रिटेल ने फ्यूचर ग्रुप के साथ 24,713 करोड़ के सौदे को पूरा करने की समयसीमा बढ़ायी

रिलायंस रिटेल ने फ्यूचर ग्रुप के साथ 24,713 करोड़ के सौदे को पूरा करने की समयसीमा बढ़ायी

रिलायंस रिटेल ने फ्यूचर ग्रुप के साथ 24,713 करोड़ के सौदे को पूरा करने की समयसीमा बढ़ायी
Modified Date: November 29, 2022 / 08:16 pm IST
Published Date: April 2, 2021 11:32 am IST

नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) रिलायंस इंडस्ट्रीज की खुदरा कारोबार करने वाली कंपनी रिलायंस रिटेल वेंचर्स ने किशोर बियानी के फ्यूचर ग्रुप के थोक व खुदरा कारोबार को खरीदने का सौदा पूरने की समय-सीमा छह महीने के लिये बढ़ा दी है।

फ्यूचर रिटेल के द्वारा शेयर बाजारों को दी गयी एक सूचना के अनुसार, रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (आरआरवीएल) ने लांग स्टॉप डेट ( लंबी प्रतीक्षा तिथि) के तहत सौदा पूरा करने की समयावधि 31 मार्च, 2021 से बढ़ाकर 30 सितंबर, 2021 कर दी है।

लम्बी अवधि की तिथि के अंदर संबंधित पक्षों को सौदा पूरा करना होता है।

फ्यूचर रिटेल ने कहा, ‘‘योजना और अन्य लेन-देन दस्तावेजों के प्रावधानों के अनुसार, आरआरवीएल ने अधिकार प्रदान करने की कवायद की है, जिसमें 31 मार्च, 2021 से 30 सितंबर, 2021 तक ‘लॉन्ग स्टॉप डेट’ की समयसीमा का विस्तार किया गया है, जिसे विधिवत स्वीकार किया गया है।’’

उल्लेखनीय है कि रिलायंस और फ्यूचर के इस सौदे का अमेजन विरोध कर रही है। यह मामला अभी उच्चतम न्यायालय के समक्ष और उसका अंतिम निर्णय आना है।

इस सौदे की घोषणा 29 अगस्त 2020 को की गयी थी। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) तथा शेयर बाजारों से इस सौदे को मंजूरियां मिल चुकी हैं। एनसीएलटी और शेयरधारकों से मंजूरी की प्रतीक्षा की जा रही है।

उच्चतम न्यायालय ने फ्यूचर ग्रुप पर इस सौदे पर आगे बढ़ने से लगी रोक हटा दी है। उच्चतम न्यायालय ने एनसीएलटी को भी कार्यवाही बढ़ाने की मंजूरी दे दी है, हालांकि तब तक आदेश सुनाने को नहीं कहा है जब तक वह अपना आदेश नहीं सुना देता है।

दिल्ली उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने पिछले महीने फ्यूचर ग्रुप को सौदे पर आगे बढ़ने से रोक दिया था। इसे फ्यूचर ग्रुप ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी।

इससे पहले अमेजन ने इस सौदे के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय पंचाट का दरवाजा खटखटाया था, जिसने सौदे को रोक दिया था। बाद में अमेजन ने पंचाट के उसी फैसले को अमल में लाने के लिये उच्च न्यायालय की शरण ली थी।

भाषा सुमन मनोहर

मनोहर


लेखक के बारे में