नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) खुदरा मुद्रास्फीति मार्च में मामूली बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गई। फरवरी में यह 3.21 प्रतिशत के स्तर पर थी। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच कुछ खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि इसकी मुख्य वजह रही। सरकार की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि की दर मार्च में 3.87 प्रतिशत रही जो पिछले महीने के 3.47 प्रतिशत से अधिक है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़े नई श्रृंखला यानी 2024 को आधार वर्ष मानकर जारी किए हैं।
खुदरा महंगाई हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के चार प्रतिशत के औसत लक्ष्य से नीचे बनी हुई है।
एनएसओ के आंकड़ों के अनुसार, सोने-चांदी के आभूषण, नारियल, टमाटर और फूलगोभी की कीमतों में मार्च महीने में भारी बढ़ोतरी हुई। वहीं प्याज, आलू, लहसुन, अरहर दाल और चने की कीमतों की महंगाई दर घटी।
‘‘बिजली, गैस और अन्य ईंधन’’ श्रेणी में खुदरा मुद्रास्फीति मार्च में 1.65 प्रतिशत रही जबकि पिछले फरवरी में यह 1.52 प्रतिशत थी।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए मुद्रास्फीति दर क्रमशः 3.63 प्रतिशत और 3.11 प्रतिशत रही। मार्च, 2026 के लिए आवासीय मुद्रास्फीति दर 2.11 प्रतिशत थी।
राज्यों की बात करें तो तेलंगाना में महंगाई दर सबसे अधिक 5.83 प्रतिशत रही जबकि मिजोरम में यह सबसे कम 0.66 प्रतिशत दर्ज की गई।
सीपीआई आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए उद्योग निकाय एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद पेट्रोल तथा डीजल की दरों को अपरिवर्तित रखकर कीमतों को नियंत्रित करने का सरकार का दृष्टिकोण अत्यंत सराहनीय है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक ने रेपो दर को स्थिर बनाए रखकर आर्थिक गतिविधियों को भी समर्थन दिया है।
रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि मार्च में सीपीआई आधारित मुद्रास्फीति फरवरी की तुलना में थोड़ी बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गई जो पश्चिम एशियाई संकट के शुरुआती हल्के प्रभाव का संकेत देती है।
एनएसओ सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल करते हुए चयनित 1,407 शहरी बाजारों (ऑनलाइन बाजारों सहित) और 1,465 गांवों से वास्तविक समय के मूल्य आंकड़े एकत्र करता है।
भाषा निहारिका अजय
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