राजस्व विभाग अवैध चेक-पोस्ट पर राज्यों से ‘जमीनी हकीकत’ का पता लगाएः संसदीय समिति
राजस्व विभाग अवैध चेक-पोस्ट पर राज्यों से 'जमीनी हकीकत' का पता लगाएः संसदीय समिति
नयी दिल्ली, 10 अगस्त (भाषा) संसद की एक समिति ने सोमवार को राजस्व विभाग से कहा कि वह राज्य सरकारों से बात करके ‘जमीनी हकीकत’ पता लगाए कि पुलिस, वाणिज्यिक कर विभाग और राजमार्ग प्राधिकरण अब भी किन जगहों पर भौतिक चेक-पोस्ट चला रहे हैं, जिससे माल की आवाजाही पर असर पड़ रहा है।
वित्त संबंधी स्थायी समिति की लोकसभा में पेश ‘कार्रवाई प्रतिवेदन’ रिपोर्ट में कहा गया है कि अनधिकृत चेक-पोस्ट और वाहनों की नियमित रोक-टोक होने से जीएसटी का मूल सिद्धांत ‘एक निर्बाध, अवरोध-मुक्त राष्ट्रीय बाजार’ कमजोर होता है।
समिति ने इस बात पर नाराजगी जताई है कि राजस्व विभाग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन मामलों की राज्यों के साथ पुष्टि के लिए आगे कोई कार्रवाई की गई या नहीं, अथवा इस मुद्दे को जीएसटी परिषद के समक्ष उठाया गया या नहीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्रालय ने अपने जवाब में केवल जीएसटी ढांचे के तहत मौजूदा कानूनी प्रावधानों और तकनीकी उपायों की जानकारी दी है, लेकिन अवैध चेक-पोस्ट की वास्तविक स्थिति पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी।
संसदीय समिति ने कहा, “राजस्व विभाग संबंधित राज्य सरकारों के साथ इस विषय को उठाए, जमीनी स्थिति का आकलन करे और जरूरी होने पर इसे जीएसटी परिषद के संज्ञान में भी लाए, ताकि प्रणालीगत समाधान निकाला जा सके। आवाजाही में देरी से परिवहनकर्ताओं की सुरक्षा के लिए पोर्टल आधारित रिपोर्टिंग व्यवस्था को भी मजबूत किया जाए।”
इससे पहले मार्च में पेश अपनी रिपोर्ट में भी समिति ने राज्यों में जारी भौतिक चेक-पोस्ट के मामलों को उठाया था। उस समय समिति ने कहा था कि यह जीएसटी व्यवस्था के उद्देश्यों के विपरीत है।
राजस्व विभाग ने अपने जवाब में कहा है कि जीएसटी व्यवस्था का उद्देश्य भौतिक बाधाओं और चेक-पोस्ट को समाप्त करना है। केंद्रीय जीएसटी अधिनियम की धारा 68 के तहत केवल ‘उचित अधिकारी’ को ही माल की जांच के लिए वाहनों को रोकने का अधिकार है।
विभाग का कहना है कि ई-वे बिल प्रणाली और आरएफआईडी जैसे प्रौद्योगिकी-आधारित उपाय पहले से ही लागू हैं, जिससे ऐसे चेक-पोस्ट की अब कोई जरूरत नहीं रह जाती है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय

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