मुंबई, नौ अप्रैल (भाषा) पश्चिम एशिया में बनी नाजुक स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता के कारण निवेशकों में सतर्कता बने रहने से बृहस्पतिवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले नौ पैसे टूटकर 92.63 (अस्थायी) पर आ गया।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि संघर्ष विराम होने के बावजूद ईरान एवं इजराइल के बीच तनाव और लेबनान पर हमले जारी रहने से भू-राजनीतिक जोखिम ऊंचा बना हुआ है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 92.63 के भाव पर खुला। रुपये ने कारोबार के दौरान 92.92 के निचले स्तर और 92.53 के उच्च स्तर को भी छुआ। कारोबार के अंत में यह 92.63 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से नौ पैसे की कमजोरी दर्शाता है।
बुधवार को ईरान एवं अमेरिका के बीच संघर्ष विराम की घोषणा होने के बाद रुपया 52 पैसे मजबूत होकर 92.54 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि संघर्ष विराम के उल्लंघन की खबरें आने और इजराइली कार्रवाई जारी रहने से कच्चे तेल के दाम में तेजी आने और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से रुपये पर दबाव पड़ा।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड तीन प्रतिशत से अधिक बढ़कर 97.67 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से रुपये पर दबाव बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि डॉलर-रुपये की विनिमय दर निकट अवधि में 92.50 से 93.40 के दायरे में रह सकती है।
घरेलू शेयर बाजार में भी गिरावट देखी गई। बीएसई सेंसेक्स 931.25 अंक टूटकर 76,631.65 अंक और एनएसई निफ्टी 222.25 अंक के नुकसान के साथ 23,775.10 अंक पर आ गया।
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बुधवार को 2,811.97 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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