नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की उस याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया, जिसमें उसने जेट एयरवेज के पूर्व कामगारों और कर्मचारियों को भविष्य निधि (पीएफ) तथा ग्रैच्युटी का पूरा बकाया भुगतान करने के राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के आदेश को चुनौती दी थी।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने 30 जून के एनसीएलएटी के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
पीठ ने कहा, ‘‘हालांकि, इस अपील में ऐसे तर्क दिए गए हैं जिन पर विचार किया जा सकता है और सामान्य परिस्थितियों में इस न्यायालय को उन पर फैसला करना पड़ता, लेकिन मामले के विशेष तथ्यों को देखते हुए हम आदेश में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं। कानून से जुड़े सवालों को उचित मामले में विचार के लिए खुला रखा जाता है।’’
एनसीएलएटी ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के पहले के आदेश को बरकरार रखा था। एनसीएलटी ने एयरलाइन कंपनी के परिसमापक को भविष्य निधि और ग्रैच्युटी के बकाये का भुगतान करने का निर्देश दिया था। एनसीएलएटी ने एसबीआई और सात अन्य वित्तीय ऋणदाताओं की अपील भी खारिज कर दी थी।
ऋणदाताओं ने दलील दी थी कि भविष्य निधि, ग्रैच्युटी और पेंशन कोष से जुड़े बकाये को परिसमापन संपत्ति का हिस्सा माना जाना चाहिए और दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत सभी ऋणदाताओं के बीच वितरित किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसे बकाया को परिसमापन संपत्ति से तभी बाहर रखा जा सकता है, जब परिसमापन शुरू होने के समय भविष्य निधि और ग्रैच्युटी के लिए अलग कोष मौजूद हों।
एनसीएलएटी ने कहा था कि कर्मचारियों के वैधानिक बकाया परिसमापन संपत्ति से बाहर रहेंगे और इस तरह उन्हें अन्य ऋणदाताओं के दावों से सुरक्षा मिलेगी।
शीर्ष अदालत ने नवंबर, 2024 से ठप खड़ी एयरलाइन के परिसमापन, सफल बोलीदाता जालान कालरॉक गठजोड़ द्वारा डाली गई 200 करोड़ रुपये की राशि को जब्त करने का आदेश दिया था और एसबीआई के नेतृत्व वाले ऋणदाताओं को 150 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी भुनाने की अनुमति दी थी।
भाषा
योगेश अजय
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