सेबी ने बाजार मध्यस्थों के ‘उपयुक्त और सक्षम व्यक्ति’ नियम में संशोधन किए

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सेबी ने बाजार मध्यस्थों के ‘उपयुक्त और सक्षम व्यक्ति’ नियम में संशोधन किए

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  • Publish Date - April 17, 2026 / 06:27 PM IST,
    Updated On - April 17, 2026 / 06:27 PM IST

नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (भाषा) बाजार नियामक सेबी ने बाजार मध्यस्थों के लिए ‘उपयुक्त और सक्षम व्यक्ति’ रूपरेखा में संशोधन करते हुए आर्थिक मामलों में आपराधिक शिकायत, प्राथमिकी या आरोप-पत्र दाखिल होने के आधार पर स्वतः अयोग्यता की व्यवस्था समाप्त कर दी है।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की तरफ से 15 अप्रैल को जारी अधिसूचना के मुताबिक, अब लंबित आपराधिक शिकायत या आर्थिक अपराध से जुड़े मामलों में आरोप-पत्र दाखिल होना अपने-आप में अयोग्यता का कारण नहीं माना जाएगा।

यह कदम नियामकीय प्रक्रिया में अधिक स्पष्टता और निष्पक्षता लाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

हालांकि, सेबी ने अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के मामलों में अयोग्य पाए जाने का दायरा बढ़ा दिया है। अब नैतिक रूप से गलत आचरण से जुड़े अपराधों के अलावा आर्थिक अपराधों और प्रतिभूति कानूनों के उल्लंघन में दोषी ठहराया जाना भी अयोग्यता का आधार बनेगी।

नए प्रावधानों के तहत किसी कंपनी को सिर्फ ‘बंद करने’ (वाइंड-अप) की प्रक्रिया शुरू होने भर से उसे अयोग्य नहीं माना जाएगा। लेकिन यदि कंपनी के खिलाफ परिसमापन का आदेश पारित हो जाता है तो अयोग्यता लागू होगी।

सेबी ने यह भी अनिवार्य किया है कि मध्यस्थ किसी भी अयोग्यता से संबंधित घटना की जानकारी 15 कार्यदिवसों के भीतर नियामक को दें। इसके अलावा, किसी व्यक्ति को ‘अनुपयुक्त एवं अक्षम’ घोषित करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाएगा।

इसके साथ ही सेबी ने ऐसे मामलों में पंजीकरण के लिए स्वतः लागू पांच वर्ष की अयोग्यता अवधि खत्म कर दी है, जहां आदेश में कोई अवधि निर्दिष्ट नहीं थी।

साथ ही, कारण बताओ नोटिस जारी होने पर आवेदन पर विचार न किए जाने की अवधि को भी एक वर्ष से घटाकर छह माह कर दिया गया है।

सेबी ने स्पष्ट किया कि किसी संबद्ध इकाई को ‘अनुपयुक्त एवं अक्षम’ घोषित किए जाने का असर अन्य इकाइयों पर तब तब नहीं पड़ेगा, जब तक उनका सीधे उसी घटना से संबंध न हो।

हालांकि, प्रमुख व्यक्तियों के ऐसे घोषित होने पर संबंधित मध्यस्थों को 30 कार्यदिवस के भीतर उन्हें बदलना होगा या छह माह के भीतर उनकी हिस्सेदारी और मतदान अधिकार समाप्त कराने होंगे।

इससे पहले, सेबी ने मार्च में इस ढांचे में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण