नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (भाषा) सरकार ने शुक्रवार को कहा कि उसने 2025-26 के दौरान 55,200 से अधिक संस्थाओं को ‘स्टार्टअप’ के रूप में मान्यता दी है।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि 2016 में स्टार्टअप इंडिया पहल की शुरुआत के बाद से एक साल में मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की यह सबसे अधिक संख्या है।
इस पहल की शुरुआत 16 जनवरी, 2016 को एक कार्य योजना के साथ की गई थी, जिसमें नवोन्मेष को पोषण देने, निजी निवेश को प्रोत्साहित करने और देश भर में स्टार्टअप का समर्थन करने के लिए योजनाएं और प्रोत्साहन शामिल थे।
मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या 31 मार्च तक 2.23 लाख को पार कर गई है। मंत्रालय ने कहा कि इन फर्मों ने 23.36 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार पैदा किए हैं।
मंत्रालय ने कहा, ”सरकार ने 2025-26 के दौरान 55,200 से अधिक स्टार्टअप को मान्यता दी है, जो स्टार्टअप इंडिया पहल की शुरुआत के बाद से एक साल में मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की सबसे अधिक संख्या है।”
सरकार फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप (एफएफएस), स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम (एसआईएसएफएस) और क्रेडिट गारंटी स्कीम फॉर स्टार्टअप (सीजीएसएस) जैसी प्रमुख योजनाओं के जरिये स्टार्टअप का समर्थन कर रही है। इसके तहत विभिन्न चरणों में वित्तीय सहायता दी जाती है।
एफएफएस के तहत 2025-26 के अंत तक 135 से अधिक वैकल्पिक निवेश कोषों (एआईएफ) को 7,000 करोड़ रुपये से अधिक दिए गए हैं, जिन्होंने आगे 1,420 से अधिक स्टार्टअप में 26,900 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। इस पर आगे बढ़ते हुए सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को अधिसूचित किया है।
स्टार्टअप के लिए क्रेडिट गारंटी योजना का 2025-26 में विस्तार किया गया है, ताकि प्रति उधारकर्ता गारंटी कवर को 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये किया जा सके। वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक 1,250 करोड़ रुपये से अधिक के 410 से अधिक ऋणों की गारंटी दी गई है।
मंत्रालय ने कहा कि स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना के तहत 219 ‘इनक्यूबेटर’ का चयन किया गया है, और 945 करोड़ रुपये का पूरा कोष प्रतिबद्ध किया गया है। इन इनक्यूबेटर ने 3,400 से अधिक स्टार्टअप को 605 करोड़ रुपये से अधिक के वित्त पोषण को मंजूरी दी है।
भाषा पाण्डेय रमण
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