सेबी के अनुबंध समाप्ति दिन से संबंधित सुधारों से अस्थिरता पर लगेगी लगाम: विशेषज्ञ

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सेबी के अनुबंध समाप्ति दिन से संबंधित सुधारों से अस्थिरता पर लगेगी लगाम: विशेषज्ञ

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  • Publish Date - September 13, 2026 / 02:20 PM IST,
    Updated On - September 13, 2026 / 02:20 PM IST

नयी दिल्ली, 13 सितंबर (भाषा) बाजार विशेषज्ञों ने वायदा-विकल्प अनुबंध समाप्ति (एक्सपायरी) वाले दिन के कारोबारी ढांचे में आमूलचूल बदलाव के सेबी के प्रस्ताव का समर्थन किया है। उनका कहना है कि इन बदलावों से सत्र के अंतिम चरण की नीलामी (क्लोजिंग ऑक्शन) के दौरान अस्थिरता और हेरफेर से निपटा जा सकेगा, साथ ही निपटान प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी।

विशेषज्ञों की यह टिप्पणी भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा शनिवार को जारी एक परामर्श पत्र के बाद आई है। इसमें नियामक ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस), बाजार के समय और वायदा-विकल्प अनुबंधों के निपटान के तरीकों में बदलाव का प्रस्ताव दिया है।

इन प्रस्तावों में वायदा-विकल्प के निपटान मूल्य को नकद बाजार के अंतिम मूल्य से अलग करना, सीएएस के दौरान ताजा सांकेतिक सूचकांक मूल्यों के प्रकाशन को बंद करना और एक निश्चित प्रतिशत के दायरे से बाहर दिए गए ऑर्डर को अधिक बाध्यकारी बनाना शामिल है।

आनंद राठी वेल्थ लिमिटेड के संयुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) फिरोज अजीज ने कहा कि सेबी ने तीन बड़े मुद्दों का समाधान किया है – नकद बाजार का अंतिम मूल्य और वायदा-विकल्प निपटान मूल्य के बीच संबंध, सांकेतिक नीलामी कीमतों के कारण होने वाली विसंगतियां, और नीलामी प्रक्रिया के दौरान ऑर्डर रद्द किए जाने की समस्या।

अजीज ने कहा, ‘‘सबसे महत्वपूर्ण कदम यह है कि वायदा-विकल्प अनुबंध का निपटान बिल्कुल नकद बाजार अंतिम मूल्य पर ही होना अनिवार्य नहीं है। सेबी ने स्वीकार किया है कि नकद और वायदा-विकल्प बाजार अलग-अलग उद्देश्यों को पूरा करते हैं।’’

उन्होंने कहा कि नयी व्ययवस्था लागू होने के कुछ ही सप्ताह के भीतर ढांचे की समीक्षा करने की सेबी की तत्परता कार्यान्वयन, निगरानी और सुधार के माध्यम से बाजार संरचना में बदलाव के एक प्रभावी नजरिये को दर्शाती है।

भाषा पाण्डेय अजय

अजय