सेबी का छोटे मूल्य की प्रतिभूतियों के लिए मर्चेंट बैंकर नियुक्त करने की जरूरत को हटाने का प्रस्ताव

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सेबी का छोटे मूल्य की प्रतिभूतियों के लिए मर्चेंट बैंकर नियुक्त करने की जरूरत को हटाने का प्रस्ताव

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  • Publish Date - August 27, 2026 / 05:11 PM IST,
    Updated On - August 27, 2026 / 05:11 PM IST

नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) बाजार नियामक सेबी ने बृहस्पतिवार को निजी नियोजन आधार पर जारी की जाने वाली छोटे मूल्य की प्रतिभूतियों के लिए सूचीबद्ध कंपनियों को मर्चेंट बैंकर की नियुक्ति अनिवार्य करने के नियम से छूट देने का प्रस्ताव किया।

इस कदम का उद्देश्य अनुपालन लागत कम करना और बाजार के विकास को बढ़ावा देना है।

मौजूदा नियम के तहत 10,000 रुपये अंकित मूल्य वाली ऋण प्रतिभूतियों या गैर-परिवर्तनीय विमोच्य तरजीही शेयरों के निजी नियोजन के लिए जारीकर्ता को कम से कम एक मर्चेंट बैंकर नियुक्त करना होता है।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बार्ड (सेबी) ने परामर्श पत्र में कहा कि इससे बॉन्ड जारीकर्ताओं के लिए पूंजी की लागत बढ़ जाती है, जिससे प्रस्तावित निर्गम आर्थिक रूप से कम व्यावहारिक हो जाते हैं। इससे कंपनियां छोटे मूल्य के बॉन्ड को बार-बार जारी करने को लेकर हतोत्साहित होती हैं।

इसको ध्यान में रखते हुए सेबी ने ‘छोटे मूल्य के बॉन्ड’ के लिए मर्चेंट बैंकर नियुक्त करने की अनिवार्यता से छूट देने का प्रस्ताव किया है।

सेबी ने कहा, ‘‘10,000 रुपये अंकित मूल्य वाले ऋण प्रतिभूतियों या गैर-परिवर्तनीय विमोच्य तरजीही शेयरों के निजी नियोजन के आधार पर पूंजी जुटाने को सुगम बनाने के लिए ऐसे निर्गमों को कुछ शर्तों के साथ मर्चेंट बैंकर नियुक्त करने की अनिवार्यता से छूट देने का निर्णय लिया गया है।’’

प्रस्तावित शर्तों के तहत निर्गम जारीकर्ता किसी वित्तीय क्षेत्र के नियामक के साथ पंजीकृत या उसके नियमन के दायरे में होना चाहिए और कम से कम एक वर्ष से किसी मान्यता प्राप्त शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना चाहिए। इसके अलावा, शेयर बाजारों को सैद्धांतिक मंजूरी देते समय यह सुनिश्चित करना होगा कि जारीकर्ता पर नियामक या शेयर बाजारों द्वारा लगाया गया कोई जुर्माना या दंड लंबित न हो।

अन्य शर्तों के तहत जारीकर्ता ने पिछले तीन वित्त वर्षों और मौजूदा वित्त वर्ष में जमा या उस पर देय ब्याज, गैर-परिवर्तनीय तरजीही शेयरों या ऋण प्रतिभूतियों के विमोच्य और उन पर देय ब्याज, शेयरधारकों को लाभांश की घोषणा एवं भुगतान तथा किसी ऋण या उस पर देय ब्याज के भुगतान में चूक नहीं की हो। जारीकर्ता को इस संबंध में लेखा परीक्षक का प्रमाणपत्र शेयर बाजार में जमा करना होगा।

सेबी ने इस प्रस्ताव पर 17 सितंबर तक लोगों से सुझाव मांगे हैं।

भाषा रमण अजय

अजय