नयी दिल्ली, 29 जुलाई (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया लि. की अनुषंगी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लि. (एसईसीएल) ने पिछले दो वित्त वर्षों में बंद पड़ी 28 कोयला खदानों को वैज्ञानिक तरीके से बंद किया है। यह पहल भूमि क्षरण, सुरक्षा जोखिम और बिना उपयोग वाले बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दों से निपटने के उद्देश्य से की गई है।
कंपनी ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि वैज्ञानिक तरीके से बंद की जाने वाली 54 परित्यक्त यानी बंद पड़ी खदानों की पहचान की गई थी। इनमें से वित्त वर्ष 2024-25 में तीन और 2025-26 में 25 खदानों को सफलतापूर्वक वैज्ञानिक तरीके से बंद किया गया।
एसईसीएल का लक्ष्य चालू वित्त वर्ष में 11 और खदानों को बंद करना है, जबकि शेष 15 खदानों को वित्त वर्ष 2027-28 में चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाएगा।
एसईसीएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक हरीश दुहान ने कहा, ‘‘खदान बंद होना खनन गतिविधि का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। कंपनी का उद्देश्य भूमि पुनर्स्थापन, पर्यावरण संरक्षण और पुनर्विकसित खदान क्षेत्रों को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, आजीविका सृजन तथा स्थानीय समुदायों के उपयोगी संसाधन के रूप में विकसित करना है।’’
कंपनी वर्तमान में आठ खदानों के पुनः उपयोग में लाने की परियोजनाओं पर काम कर रही है, जो कोल इंडिया की सभी कंपनियों में सबसे अधिक हैं। इनमें बिश्रामपुर स्थित केनपारा इको पार्क का निर्माण पुनर्विकसित खदान भूमि पर पूरा हो चुका है।
इसके अलावा विवेक नगर भूमिगत खदान में इको पार्क के साथ पांच मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना विकसित की जा रही है। एसईसीएल भाटगांव और बिश्रामपुर में 20 मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र चालू कर चुकी है, जबकि पिनौरा भूमिगत खदान में 40 मेगावाट की सौर परियोजना निर्माणाधीन है।
भाषा रमण अजय
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