नयी दिल्ली, छह मई (भाषा) नीति आयोग के पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत ने शुक्रवार को कहा कि वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की भारत की यात्रा ‘राष्ट्रीय चरित्र’ को मजबूत करने और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भरता हासिल करने पर निर्भर करेगी।
कांत ने ‘भारत की सोच’ संगठन द्वारा आयोजित एक सत्र में कहा कि भारत को औपनिवेशिक काल के ढांचों से आगे बढ़ना होगा और ऐसे संस्थान एवं विकास मॉडल बनाने होंगे जो उसकी अपनी वास्तविकताओं और सभ्यतागत मूल्यों में निहित हों।
इस चर्चा का मुख्य विषय शासन सुधार, प्रौद्योगिकी संप्रभुता, विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि और समावेशी विकास था।
कांत ने कहा, ‘‘भविष्य में भारत की वृद्धि के लिए नवीकरणीय ऊर्जा, सेमीकंडक्टर विनिर्माण, अहम खनिज और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक निवेश की जरूरत होगी ताकि बाहरी निर्भरता कम हो सके और दीर्घकालिक मजबूती हासिल की जा सके।’’
उन्होंने शासन और सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने में डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और मुक्त स्रोत वाली प्रौद्योगिकी प्रणालियों की भूमिका पर भी जोर दिया।
इस चर्चा में ‘भारत की सोच’ के अध्यक्ष अनिल राजपूत ने कहा कि भारत की विकास यात्रा का मार्गदर्शन ऐसे संस्थानों द्वारा किया जाना चाहिए जो भारतीय वास्तविकताओं में निहित हों और साथ ही वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भी बने रहें।
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