मुंबई, पांच जून (भाषा) मौद्रिक नीति घोषणाओं के बीच शेयर बाजारों में शुक्रवार को मुनाफावसूली होने से गिरावट आई और मानक सूचकांक बीएसई सेंसेक्स 117 अंक टूट गया जबकि एनएसई निफ्टी 49.85 अंक नुकसान में रहा।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तरफ से आर्थिक वृद्धि का अनुमान घटाने और महंगाई के अनुमान को बढ़ाने के बीच मुनाफावसूली होने से बाजार नुकसान में रहा। साथ ही विदेशी पूंजी की निकासी और एशिया के अन्य बाजारों में कमजोर रुख से बाजार पर प्रतिकूल असर पड़ा।
तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 116.67 अंक यानी 0.16 प्रतिशत टूटकर 74,243.34 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान ऊंचे में 74,717.57 गया और नीचे में 73,988.75 तक आया। इस तरह सेंसेक्स में कुल 728.82 अंकों का उतार-चढ़ाव देखा गया।
एनएसई का मानक सूचकांक निफ्टी 49.85 अंक यानी 0.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,366.70 पर बंद हुआ।
आरबीआई ने शुक्रवार को उम्मीद के अनुरूप प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा। इसके साथ पश्चिम एशिया संघर्ष, ऊर्जा की ऊंची कीमतों और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में समस्या के कारण वृद्धि और मुद्रास्फीति के बढ़ते जोखिमों के बीच विदेशी पूंजी आकर्षित करने और रुपये को समर्थन देने के लिए कई उपायों की घोषणा की गई।
सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में से ट्रेंट, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), टाटा स्टील, एनटीपीसी, एचसीएल टेक और भारती एयरटेल प्रमुख रूप से नुकसान में रहीं।
दूसरी तरफ, लाभ में रहने वाले शेयरों में हिंदुस्तान यूनिलीवर, एक्सिस बैंक, अदाणी पोर्ट्स और बजाज फाइनेंस शामिल हैं।
आरबीआई ने मौजूदा परिस्थितियों पर गौर करते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत जबकि खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘मौद्रिक नीति उम्मीद के अनुरूप रहने से घरेलू शेयर बाजार लगभग स्थिर बंद हुए। आरबीआई के उपायों से रुपये को मजबूत करने में मदद मिली। हालांकि, वृद्धि अनुमान में कमी और मुद्रास्फीति के संतुलित दृष्टिकोण के बीच निवेशकों ने मुनाफावसूली को तरजीह दी।’’
सरकार ने घोषणा की है कि वह एक अप्रैल, 2026 से सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले पात्र विदेशी निवेशकों के लिए ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर कर छूट देगी। वहीं आरबीआई ने बिना पाबंदी वाले विदेशी निवेश मार्ग के तहत उपलब्ध सरकारी बॉन्ड के दायरे को बढ़ाया है।
केंद्रीय बैंक ने विदेशी ऋण जुटाने वाली सरकारी कंपनियों के लिए रियायती विदेशी मुद्रा अदला-बदली की भी घोषणा की। वह प्रवासी भारतीयों से डॉलर प्रवाह को आकर्षित करने के लिए 30 सितंबर तक तीन से पांच साल की अवधि के नए एफसीएनआर (बी) जमा पर जोखिम कम करने को लेकर लागत को वहन करेगा।
इन उपायों का उद्देश्य रुपये को मजबूत करना है। रुपया इस वर्ष पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल और विदेशी संस्थागत निवेशकों की रिकॉर्ड पूंजी निकासी के चलते छह प्रतिशत से अधिक टूटा है।
यस सिक्योरिटीज के कार्यकारी निदेशक और संस्थागत इक्विटी शोध प्रमुख अमर अंबानी ने कहा कि नीतिगत निर्णय के साथ, आरबीआई और सरकार ने विदेशी पूंजी को आकर्षित करने और लगातार विदेशी पोर्टफोलियो निवेश निकासी के बीच भारतीय रुपये को समर्थन देने के लिए उपायों के एक व्यापक पैकेज की घोषणा की है।
इस बीच, वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.11 प्रतिशत कमजोर होकर 94.93 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
एशिया के अन्य बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए।
यूरोप के प्रमुख बाजारों में ज्यादातर में तेजी का रुख था। अमेरिकी बाजार में ज्यादातर बृहस्पतिवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे।
शेयर बाजारों के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बृहस्पतिवार को 4,447.06 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
सेंसेक्स बृहस्पतिवार को मामूली 13.84 अंक नुकसान में रहा था जबकि निफ्टी में 10.95 अंक की गिरावट रही थी।
भाषा रमण प्रेम
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