नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) देश का सेवा निर्यात वृद्धि के लिए एक स्थिर आधार बना हुआ है और शुल्क-संबंधी अनिश्चितताओं के बीच इसने वस्तु निर्यात में बढ़ी अस्थिरता को आंशिक रूप से संतुलित किया है। संसद में बृहस्पतिवार को पेश आर्थिक समीक्षा में यह कहा गया।
अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च शुल्क के बावजूद देश के माल निर्यात में 2.4 प्रतिशत (अप्रैल-दिसंबर 2025 अवधि में) की वृद्धि हुई, जबकि सेवा निर्यात में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
समीक्षा में कहा गया, ‘‘सेवा निर्यात लगातार वृद्धि के लिए स्थिर आधार बना हुआ है जिससे शुल्क संबंधी अनिश्चितताओं के बीच वस्तुओं के निर्यात में अधिक अस्थिरता की आंशिक रूप से भरपाई हुई है।’’
वित्त वर्ष 2024-25 में सेवा निर्यात 387.5 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जिसमें सालाना 13.6 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। इससे भारत को प्रौद्योगिकी, व्यापार और पेशेवर सेवाओं का वैश्विक केंद्र बनाने की स्थिति और मजबूत हुई।’’
कुल सेवा निर्यात में 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रखने वाली सॉफ्टवेयर सेवाएं वृद्धि का मुख्य चालक बनी हुई हैं।
समीक्षा में कहा गया कि नीतिगत अस्थिरता और भू-राजनीतिक बाधाओं के कारण वैश्विक वस्तु व्यापार धीमा होने के बीच, सेवा निर्यात देश के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच का काम कर रहा है।
भाषा
योगेश अजय
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