Shakkar Kitne Rupaye Kilo Hai: 15 रुपए प्रति किलो महंगा हुआ शक्कर, त्योहारी सीजन में आम जनता के लिए चिंताजनक खबर, केंद्र सरकार ने तय की स्टॉक रखने की लिमिट / Image: AI Generated
नई दिल्ली: Shakkar Kitne Rupaye Kilo Hai भारत में त्योहारों का सीजन शुरू हो चुका है। हरियाली अमावस्या के बाद आगामी दिनों में रक्षाबंधन, कृष्ण जन्माष्टमी और तीज जैसे प्रमुख त्योहार आने वाले हैं। लेकिन इससे पहले चीनी के बढ़ते दाम ने आम जनता की टेंशन बढ़ा दी है। खुदरा बाजार में चीनी के दाम की बात करें तो 65 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। बता दें कि पहली बार चीनी 65 रुपए प्रति किलोग्राम तक महंगा हुआ है। कारोबारियों की मानें तो 15 दिन में चीने के दाम 15 रुपए प्रति किलोग्राम तक बढ़ गए हैं। हालात को देखते हुए सरकार ने थोक व्यापारियों को सिर्फ 15 दिन का स्टॉक जमा करने का निर्देश दिया है। सरकार ने ऐसा फैसला इसलिए लिया ताकि त्योहारी सीजन में जमाखोरी ना हो और खुदरा बाजार में कीमतें असामान तक ना पहुंचे।
Shakkar Kitne Rupaye Kilo Hai भारत सरकार की ओर से जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार 1 सितंबर 2026 से थोक व्यापारियों के लिए चीनी के स्टॉक की लिमिट घटाकर 15 दिन कर दी गई। – यानी महीने में 10 मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करने वाले थोक व्यापारी 15 दिन से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। ये नया नियम 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगा।
त्योहारी सीजन से पहले चीनी की जमाखोरी पर केंद्र की नजर, Bulk Consumers को अब सिर्फ 15 दिन का स्टॉक रखने की अनुमति
चीनी के स्टॉक पर केंद्र सरकार की बड़ी सख्ती
– 1 सितंबर 2026 से Bulk Consumers के लिए Sugar Stock Limit घटाकर 15 दिन कर दी गई।
– यानी महीने में 10 मीट्रिक टन से… pic.twitter.com/QM3u4HMXqW— Ambarish Pandey (@pandeyambarish) August 20, 2026
कारोबारियों के मुताबिक, बाजार में मांग की तुलना में करीब आधी ही चीनी की आपूर्ति हो पा रही है। आने वाले दिनों में रक्षाबंधन, गणेशोत्सव, जन्माष्टमी और दिवाली जैसे त्योहारों से मांग और बढ़ेगी। इससे चीनी के दाम में और तेजी आने की आशंका है। कारोबारियों की मानें तो 15 दिन पहले चीनी 48-50 रुपए किलो बिक रही थी। अब इसका भाव बढ़कर 65 रुपए किलो तक पहुंच गया है।
कारोबारियों का कहना है कि इस बार चीनी का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले करीब पांच फीसदी कम रहा है। इसका असर बाजार में उपलब्ध भंडार पर पड़ा है। नया पेराई सत्र अक्टूबर के अंत या नवंबर की शुरुआत में शुरू होता है। चीनी मिलों ने अधिक लाभ के लिए गन्ने से चीनी बनाने के बजाय एथेनॉल उत्पादन को प्राथमिकता दी। पेट्रोल और शराब बनाने वाली कंपनियों की ओर से एथेनॉल की मांग बढ़ने से चीनी का उत्पादन प्रभावित हुआ है।