कौशल ‘नई मुद्रा’ और नवाचार ‘नई अर्थव्यवस्था’ है: मुख्यमंत्री यादव
कौशल ‘नई मुद्रा’ और नवाचार ‘नई अर्थव्यवस्था’ है: मुख्यमंत्री यादव
भोपाल, 24 अगस्त (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को कौशल को ‘नई मुद्रा’ और नवाचार को ‘नई अर्थव्यवस्था’ करार देते हुए कहा कि देश के संस्थानों को कौशल, अनुसंधान, नवोन्मेष और उद्यमिता का केंद्र बनना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने साल 2047 तक मध्यप्रदेश को समृद्ध बनाने में केंद्र पोषित संस्थानों के योगदान को लेकर आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए प्रकाशन से लेकर पेटेंट, प्रोटोटाइप और उद्यमों तक आर्थिक और ज्ञान मूल्य श्रृंखला स्थापित करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, ‘‘आज, कौशल नई मुद्रा है, और नवाचार नई अर्थव्यवस्था है। हमारे संस्थानों को कौशल, अनुसंधान, नवोन्मष और उद्यमिता का केंद्र बनना चाहिए।’’
यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सभी क्षेत्रों में मजबूत हो रहा है और हर चुनौती को अपनी ताकत से पार करने की क्षमता रखता है।
उन्होंने कहा, ‘‘मध्यप्रदेश अवसरों की भूमि है और प्रतिभाशाली युवा, प्राकृतिक संसाधन, कृषि शक्ति, उद्यमिता और औद्योगिक क्षमता हमारे संसाधन हैं।’’
सम्मेलन के ‘एक संस्थान, एक वादा’ विषय का जिक्र करते हुए यादव ने कहा कि इसका उद्देश्य मध्यप्रदेश को 2047 तक समृद्ध बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में राज्य में स्थित केंद्रीय संस्थानों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के दौरान विभिन्न संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।
इस अवसर पर यादव ने स्मारिका ‘समृद्ध मध्यप्रदेश@2047: केंद्रीय संस्थानों का सम्मेलन’ का विमोचन भी किया।
इस सम्मेलन का आयोजन अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ गुड गवर्नेंस एंड पॉलिसी एनालिसिस द्वारा किया गया था।
यादव ने कहा कि इन संस्थानों में उपलब्ध ज्ञान और प्रौद्योगिकी का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। देश भर के विभिन्न केंद्रीय संस्थानों के प्रतिनिधियों का एक मंच पर एकत्र होना मध्य प्रदेश के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह संस्थानों को अपनी उपलब्धियों, विशेषज्ञता और योजनाओं को साझा करने का अवसर प्रदान करेगा। साथ ही राज्य की जरूरतों में भी योगदान देगा।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्थानों में उपलब्ध ज्ञान और प्रौद्योगिकी का लाभ प्रयोगशालाओं और परिसरों तक ही सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘एक संस्था, एक वादा’ सिर्फ एक विचार नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश के भविष्य के निर्माण की योजना है। प्रत्येक संस्था को राज्य के विकास से संबंधित व्यावहारिक संकल्प तैयार करने चाहिए जिन्हें एक निश्चित समय सीमा के भीतर लागू किया जा सके। राज्य सरकार इन संकल्पों और नवाचारों को लागू करने में पूरा सहयोग प्रदान करेगी।’’
यादव ने मध्यप्रदेश में पर्याप्त प्राकृतिक संसाधनों, भूमि, युवा शक्ति और संस्थागत क्षमता का जिक्र करते हुए हुए भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए युवा कौशल विकसित करने की आवश्यकता बतायी।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय और राज्य स्तर के संस्थानों को कौशल विकास, अनुसंधान, डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, ऊर्जा, पर्यावरण, उद्योग और नवाचार के क्षेत्रों में मिलकर काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘यह युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, उद्यमिता को प्रोत्साहित करेगा और राज्य का संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करेगा।’
यादव ने कहा कि सरकार, शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और उद्योग के बीच प्रभावी समन्वय मध्यप्रदेश को ज्ञान और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से आगे बढ़ाएगा।
उन्होंने कहा कि संस्थानों द्वारा किए गए अनुसंधान को वास्तविक दुनिया की समस्याओं का समाधान करना चाहिए और नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना चाहिए।
मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 दृष्टिकोण पत्र विकसित भारत का लक्ष्य है।
उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी ने इसे हासिल करने के लिए सात संकल्पों की रूपरेखा तैयार की है। मध्यप्रदेश प्रौद्योगिकी और नवाचार में अग्रणी राज्य है। हमारा लक्ष्य वर्ष 2047 के लिए राज्य के सभी विकास प्रयासों को एकजुट करना है। इसके लिए नागरिक समाज, उद्यमियों, संस्थानों और प्रत्येक नागरिक की भागीदारी की आवश्यकता है।’’
सम्मेलन में, राज्य में शिक्षा, अनुसंधान, कौशल विकास और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रतिष्ठित शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के साथ 13 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।
भाषा ब्रजेन्द्र राजकुमार रमण
रमण

Facebook


