लागत से कम दाम पर बिकवाली से सोयाबीन तेल में गिरावट, डीओसी की मांग से सोयाबीन तिलहन मजबूत

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लागत से कम दाम पर बिकवाली से सोयाबीन तेल में गिरावट, डीओसी की मांग से सोयाबीन तिलहन मजबूत

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  • Publish Date - May 12, 2026 / 08:10 PM IST,
    Updated On - May 12, 2026 / 08:10 PM IST

नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) आयातकों द्वारा आयातित सोयाबीन तेल लागत से नीचे दाम पर बेचने के कारण मंगलवार को देश के बाजारों में सोयाबीन तेल के दाम में गिरावट दर्ज हुई जबकि सोयाबीन के तेल रहित खल (डी-आयल्ड केक या डीओसी) की स्थानीय मांग बढ़ने के बीच सोयाबीन तिलहन के दाम में सुधार देखने को मिला। सामान्य और सुस्त कामकाज के बीच बाकी तेल-तिलहनों के दाम स्थिर बने रहे।

मलेशिया एक्सचेंज में गिरावट है जबकि कल रात शिकॉगो एक्सचेंज गिरावट के साथ बंद हुआ था और फिलहाल इसमें मामूली सुधार है।

बाजार सूत्रों ने कहा कि देश के आयातक बैंकों में अपना ‘लेटर आफ क्र्रेडिट’ या ऋण साख-पत्र (एलसी) घुमाते रहने के चक्कर में आयात किया गया सोयाबीन तेल लागत से 3-3.5 प्रतिशत नीचे दाम पर बेच रहे हैं। इससे बैंकों के कर्ज डूबने की आशंका रहती है दूसरा यह कि यह कारोबारी धारणा को प्रभावित करता है। लेकिन इस बारे में शायद किसी समीक्षक ने चिंता जताई हो और सरकार को इसके नुकसान के बारे में आगाह किया हो।

उन्होंने कहा कि सरकार को इस बात की ओर ध्यान देना होगा कि इस घाटे के कारोबार के बीच बैंकों के ऋण की क्या स्थिति है।

सूत्रों ने कहा कि दूसरी ओर सोयाबीन के डीओसी की स्थानीय और निर्यात मांग के कारण सोयाबीन तिलहन के दाम में सुधार आया।

उन्होंने कहा कि सोयाबीन का या तो सरकार के पास या फिर कुछ किसानों के पास स्टॉक है। सरकार के पास तेलंगाना, गुजरात या महाराष्ट्र में सोयाबीन तिलहन का स्टॉक है। महाराष्ट्र के सांगली में अगले 15-20 दिन में सोयाबीन की बिजाई शुरू हो सकती है। कई साल के बाद किसानों को सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से अच्छे दाम मिले हैं और किसानों में इसका उत्साह भी है। इससे आगे इसकी बिजाई का रकबा बढ़ने की उम्मीद की जा रही है।

सामान्य और सुस्त कामकाज के बीच बाकी अन्य तेल-तिलहनों के भाव स्थिर बने रहे। वैसे यह भी तथ्य है कि सोयाबीन तेल के साथ-साथ पाम-पामोलीन तेल भी लागत से नीचे दाम पर बिक रहा है। इस स्थिति को संभालने की आवश्यकता है। खाद्य तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर इस देश में, आयातकों द्वारा आयात लागत से नीचे दाम पर खाद्य तेलों की बिक्री करना एक विरोधााभासी कदम है।

तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 7,025-7,050 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 6,650-7,125 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 15,750 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल – 2,500-2,800 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 14,350 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,400-2,500 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,400-2,545 रुपये प्रति टिन।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 15,650 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 15,550 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 12,100 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 13,625 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 15,350 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 15,400 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 14,275 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 7,150-7,200 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 6,800-6,875 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय